शिलाई (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश के युवाओं में नशे की लत अब जानलेवा साबित होने लगी है। यह नशा अब तक कई घरों के चिराग बुझा चुका है। ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला अब सिरमौर जिला के शिलाई क्षेत्र से सामने आया है। यहां नशे के आदी एक 23 साल के युवक का शव उसके किराये के कमरे में मिला है। इस नशे ने ना सिर्फ एक हंसता खेलता परिवार उजाड़ दिया, बल्कि मां बाप का जवान बेटा भी छीन लिया।
नशे की ओवरडोज से मौत की आशंका
मिली जानकारी के अनुसार शिलाई तहसील के कुहुंट गांव निवासी 23 वर्षीय ऋतिक चौहान का चंडीगढ़ में उसके किराये के कमरे में शव मिला है। हालांकि अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि युवक की मौत कैसे हुई, लेकिन युवक के नशे के आदी होने के चलते आशंका जाहिर की जा रही है कि युवक की मौत नशे की ओवरडोज से हुई हो सकती है। जवान बेटे की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंचीए परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
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चंडीगढ़ में नौकरी करने गया था ऋतिक
ऋतिक चौहान पुत्र चतर सिंह चंडीगढ़ में होटल लाइन में नौकरी करता था। वह शहर में एक किराये के कमरे में रह रहा था। बताया जा रहा है कि ऋतिक नशे का आदी था और इसी बीच वह अपने कमरे में मृत अवस्था में पाया गया। इतनी कम उम्र में उसकी मौत ने परिवार और परिचितों को झकझोर कर रख दिया है।
किराये के कमरे में मिली जिंदगी की आखिरी तस्वीर
बताया जा रहा है कि ऋतिक को उसके किराये के कमरे में मृत पाया गया। घटना की सूचना मिलने के बाद संबंधित स्तर पर कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। चंडीगढ़ में ही शव का पोस्टमार्टम करवाया गया। हालांकि, ऋतिक की मौत आखिर किन परिस्थितियों में हुई और इसका वास्तविक कारण क्या था, इसकी आधिकारिक पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
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मात्र 23 साल की उम्र में बुझ गया घर का चिराग
जिस उम्र में एक युवा अपने भविष्य को संवारने, करियर बनाने और परिवार के सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ता है, उसी उम्र में ऋतिक की जिंदगी का अंत हो गया। परिवार के लिए यह सदमा इसलिए भी गहरा है क्योंकि उनका जवान बेटा रोजी-रोटी के लिए घर से दूर चंडीगढ़ में रह रहा था। उसकी असमय मौत ने माता-पिता और परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है।
ऋतिक की मौत से गांव का शांत महायज्ञ भी टला
ऋतिक के निधन का असर गांव के सामूहिक कार्यक्रम पर भी पड़ा है। कुहुंट गांव में 16 सितंबर को प्रस्तावित शांत महायज्ञ को स्थगित कर दिया गया है। गांव के सदस्यों और बुजुर्गों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया। दुख की इस घड़ी में पूरे गांव ने शोकाकुल परिवार के साथ खड़े रहने का फैसला किया है।
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एक मौत ने फिर खड़े किए नशे को लेकर बड़े सवाल
ऋतिक की मौत ने हिमाचल प्रदेश में युवाओं के बीच बढ़ती नशे की समस्या को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नशे की लत केवल एक व्यक्ति की जिंदगी को प्रभावित नहीं करती, बल्कि इसका असर उसके माता-पिता, भाई-बहनों और पूरे परिवार पर पड़ता है। एक युवा के भविष्य के साथ परिवार के सपने और उम्मीदें भी टूट जाती हैं।
नशे से युवाओं को बचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी
ऋतिक की असमय मौत के बाद यह सवाल भी अहम हो गया है कि आखिर युवाओं को नशे की गिरफ्त से कैसे बचाया जाए। परिवार के साथ समाज, शिक्षण संस्थानों, प्रशासन और सामाजिक संगठनों को भी इस दिशा में लगातार प्रयास करने की जरूरत है। युवाओं को खेल, शिक्षा, रोजगार और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना नशे के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभा सकता है।
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शिलाई में शोक का माहौल
23 वर्षीय ऋतिक चौहान की मौत की खबर से कुहुंट गांव सहित पूरे शिलाई क्षेत्र में शोक का माहौल है। परिजनों, रिश्तेदारों, दोस्तों और क्षेत्रवासियों के लिए इतनी कम उम्र में एक युवा को खोना बेहद पीड़ादायक है। परिवार के जिस बेटे से भविष्य को लेकर कई उम्मीदें जुड़ी थीं, उसकी अचानक मौत ने सभी को गहरे दुख में डाल दिया है।
जांच के बाद सामने आएगा मौत का वास्तविक कारण
फिलहाल ऋतिक की मौत के वास्तविक कारण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और संबंधित जांच के बाद ही मौत की परिस्थितियों का सही पता चल सकेगा। इस घटना ने एक परिवार को गहरा दर्द दिया है और साथ ही समाज के सामने यह गंभीर संदेश भी छोड़ा है कि नशे की गिरफ्त में फंसने वाला युवा अकेला नहीं टूटता, उसके साथ पूरा परिवार बिखर जाता है।
