बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत जारी गैस कनेक्शनों को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक युवक ने आरोप लगाया है कि उसके नाम पर गैस कनेक्शन दर्ज है, जबकि उसे कभी कोई कनेक्शन मिला ही नहीं।
उज्जवल योजना में बड़ा गड़बड़झाला
हैरानी की बात यह है कि रिकॉर्ड में दर्ज यह कनेक्शन वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मेरठ क्षेत्र में संचालित होता दिख रहा है। घुमारवीं उपमंडल के दखयुत निचला गांव निवासी दिनेश कुमार के अनुसार वह अपने दिवंगत पिता के घरेलू गैस कनेक्शन को अपने नाम करवाने के लिए गैस एजेंसी पहुंचे थे।
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कनेक्शन लेने गए युवक के उड़े होश
प्रक्रिया के दौरान एजेंसी कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि उनके नाम पर पहले से ही एक गैस कनेक्शन सक्रिय है। यह जानकारी सुनकर वह स्वयं भी हैरान रह गए, क्योंकि उन्होंने कभी गैस कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं किया था।
मोबाइल नंबर भी नया लिंक
दिनेश कुमार ने जब इस संबंध में एजेंसी से विस्तृत जानकारी मांगी तो रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच के दौरान उनके नाम पर एक सक्रिय कनेक्शन दर्ज मिला। इतना ही नहीं, उस कनेक्शन के साथ जो मोबाइल नंबर जुड़ा हुआ था, वह भी उनका नहीं निकला।
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मेरठ में जल रहा चूल्हा
जांच में पाया गया कि रिकॉर्ड में दर्ज विवरण के अनुसार यह गैस कनेक्शन उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में इस्तेमाल किया जा रहा है। युवक का आरोप है कि अगर उनके नाम पर कनेक्शन जारी हुआ था- तो वह उन्हें कभी मिला क्यों नहीं।
कौन इस्तेमाल कर रहा कनेक्शन?
ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर लाभार्थी के नाम पर जारी कनेक्शन किस व्यक्ति तक पहुंचा और उसका उपयोग कौन कर रहा है। दिनेश कुमार का कहना है कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार यह कनेक्शन लढ़याणी क्षेत्र से जारी दिखाया गया है। उन्होंने संबंधित संचालक से संपर्क कर जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन कनेक्शन की वर्तमान स्थिति को लेकर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
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लाभार्थियों के रिकॉर्ड की भी जांच जरूरी
मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच भी इसकी चर्चा शुरू हो गई है। ग्रामीणों का मानना है कि अगर एक व्यक्ति के नाम पर ऐसी अनियमितता सामने आई है तो अन्य लाभार्थियों के रिकॉर्ड की भी जांच की जानी चाहिए। लोगों ने प्रशासन और संबंधित तेल कंपनी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है।
जिम्मेदार लोगों के खिलाफ हो कार्रवाई
ग्रामीणों का कहना है कि अगर मामले की गहराई से पड़ताल की गई तो योजना के तहत संभावित गड़बड़ियों या फर्जीवाड़े से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं। लोगों ने मांग की है कि अगर किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और वास्तविक लाभार्थियों को उनका अधिकार दिलाया जाए।
