शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सरकारी नियुक्तियों को लेकर बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों को दिए जा रहे सेवा विस्तार और पुनर्नियुक्ति के मामलों पर विधानसभा में सवाल उठाए गए। भाजपा विधायकों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।
124 लोगों को मिला सेवा विस्तार
दरअसल, सरकार द्वारा दिए गए लिखित उत्तर में सामने आया है कि, 1 जनवरी 2023 से 31 जुलाई 2024 के बीच वित्त विभाग के पास कुल 134 प्रस्ताव सेवा विस्तार या पुनर्नियुक्ति के लिए पहुंचे। इनमें से 124 मामलों को मंजूरी दे दी गई, जबकि केवल 2 प्रस्तावों को अस्वीकार किया गया।
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शेष कुछ मामलों में अतिरिक्त जानकारी मांगी गई थी, जिन्हें बाद में निपटा दिया गया। विभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सचिवालय प्रशासन से आए सभी 28 मामलों को स्वीकृति मिली। लोक निर्माण विभाग के 23 में से 22 मामलों को मंजूरी दी गई, जबकि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से जुड़े सभी 15 मामलों को भी हरी झंडी दे दी गई।
युवाओं के लिए सीमित हो रहे रोजगार के अवसर
इन आंकड़ों ने विपक्ष को सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का मौका दे दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार अपने पसंदीदा अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद भी महत्वपूर्ण पदों पर बनाए रखने के लिए इस प्रक्रिया का उपयोग कर रही है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित हो रहे हैं।
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हालांकि, सरकार का पक्ष है कि सभी फैसले निर्धारित नियमों और समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर ही लिए गए हैं।
विपक्ष के इस सवाल पर नहीं मिला स्पष्ट जवाब
हालांकि, विपक्ष ने एक अहम सवाल यह भी उठाया गया कि क्या इन पुनर्नियुक्तियों से सरकार को कोई विशेष लाभ हुआ है, लेकिन इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। साथ ही, कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने को लेकर भी स्थिति साफ की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
