शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में प्रॉपर्टी टैक्स बचाने के लिए कागजों में कुछ और जमीन पर कुछ और दिखाने का मामला सामने आया है। नगर निगम की जांच में ऐसी संपत्तियां पकड़ी गई हैं, जिन्हें रिकॉर्ड में खाली प्लॉट बताया गया था।

 

मगर मौके पर पहुंची टीम के सामने उन्हीं जमीनों पर चार से छह मंजिला होटल खड़े मिले। खास बात यह है कि इन होटलों में पिछले कई वर्षों से कारोबार भी चल रहा था, लेकिन नगर निगम के रिकॉर्ड में संपत्ति की जानकारी अपडेट नहीं की गई। अब निगम ने ऐसे संपत्ति मालिकों से पुराने बकाया टैक्स की वसूली की तैयारी शुरू कर दी है।

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कागजों में प्लॉट, मौके पर खड़े मिले होटल

नगर निगम की टीम संपत्तियों के मौके पर सत्यापन के लिए पहुंची तो कच्चीघाटी और भट्ठाकुफर में मामला सामने आया। जांच में कच्चीघाटी के तीन और भट्ठाकुफर के दो मामले पकड़े गए हैं।

 

निगम के अनुसार इन संपत्तियों पर वर्ष 2021-22 में ही भवनों का निर्माण हो चुका था। इसके बावजूद रिकॉर्ड में जमीन को खाली प्लॉट के तौर पर ही दर्शाया गया। मौके पर चार से छह मंजिला होटल खड़े मिले और उनमें होटल कारोबार भी संचालित हो रहा था।

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अब चार साल का टैक्स ब्याज समेत वसूलेगा निगम

नगर निगम अब इन संपत्ति मालिकों से पिछले चार वर्षों का बकाया प्रॉपर्टी टैक्स ब्याज समेत वसूल करेगा। टैक्स शाखा के आकलन के अनुसार होटल के आकार और क्षेत्रफल के आधार पर प्रत्येक मामले में करीब एक से तीन लाख रुपये तक की वसूली हो सकती है। जांच के बाद कुछ होटल मालिकों ने नगर निगम से स्व-मूल्यांकन के आवेदन फॉर्म भी लिए हैं। फॉर्म जमा होने के बाद निगम वास्तविक क्षेत्रफल के आधार पर संशोधित टैक्स बिल जारी करेगा।

खाली प्लॉट का टैक्स काफी कम

नगर निगम के अनुसार खाली जमीन पर लगने वाला संपत्ति कर भवन की तुलना में काफी कम होता है। ऐसे में रिकॉर्ड में जमीन को खाली प्लॉट दिखाकर कम टैक्स जमा करने से निगम को राजस्व का नुकसान हो सकता है। अब निगम मौके पर जाकर संपत्तियों की वास्तविक स्थिति और रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी का मिलान कर रहा है।

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सिर्फ होटल नहीं, बढ़े हुए भवन भी जांच के दायरे में

नगर निगम की जांच में केवल होटल ही नहीं, बल्कि ऐसे कई भवन मालिक भी सामने आए हैं जिन्होंने अपने भवनों का आकार एक से तीन मंजिल तक बढ़ा लिया है। इन लोगों ने बढ़े हुए निर्माण की जानकारी निगम को नहीं दी और पुराने क्षेत्रफल के आधार पर ही प्रॉपर्टी टैक्स जमा करते रहे।

 

नगर निगम अब सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ऐसे भवन मालिकों को भी संशोधित टैक्स बिल जारी कर रहा है। निगम के अनुसार अगले एक महीने में शहर के सभी भवन और भूमि मालिकों के संशोधित टैक्स बिल जारी करने की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य है।

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50 हजार तक जुर्माने का प्रावधान

नगर निगम के अनुसार प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान भवन मालिकों के लिए अनिवार्य है। गलत जानकारी देकर टैक्स कम करवाने या टैक्स चोरी करने पर नगर निगम अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

टैक्स चोरी पर होगी कार्रवाई

इसके अलावा पिछले वर्षों का बकाया टैक्स ब्याज सहित वसूला जा सकता है। टैक्स बकाया होने की स्थिति में संपत्ति से संबंधित एनओसी पर भी असर पड़ सकता है। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि टैक्स चोरी करने वाले भवन मालिकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। गलत जानकारी देकर कम टैक्स जमा करने वालों से पिछले वर्षों का बकाया भी ब्याज सहित वसूला जाएगा।

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