शिमला। दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए खोले गए कॉलेज अब खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। हिमाचल की राजधानी शिमला जिले के कुपवी में सरकारी कॉलेज को दूसरे संस्थान में मर्ज करने के फैसले ने लोगों को सड़कों पर उतरने पर मजबूर कर दिया है। इलाके के लोगों का कहना है कि जिस क्षेत्र में उच्च शिक्षा का एकमात्र सहारा यह कॉलेज है, वहां इसे बंद करने का फैसला युवाओं और खासकर बेटियों के भविष्य के साथ अन्याय होगा।
सैकड़ों लोगों ने निकाली आक्रोश रैली
चौपाल विधानसभा क्षेत्र के कुपवी में बुधवार को सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर कॉलेज को बहाल करने की मांग की। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
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प्रदर्शन के दौरान लोगों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर "सरकार हमसे शिक्षा मत छीनो", "शिक्षा के दुश्मन हाय-हाय" और "कुपवी कॉलेज बहाल करो" जैसे नारे लगाए। उनका कहना है कि दुर्गम क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए दूसरे शहरों में जाकर पढ़ाई करना आसान नहीं है।
'टीचर नहीं दिए, फिर संख्या कम होने का हवाला'
प्रदेश सरकार ने 5 जून को 100 से कम छात्र संख्या वाले 10 सरकारी डिग्री कॉलेजों को नजदीकी कॉलेजों में मर्ज करने का फैसला लिया था। इनमें कुपवी डिग्री कॉलेज भी शामिल है। सरकार के आदेशों के अनुसार अगले शैक्षणिक सत्र से यहां नए दाखिले नहीं होंगे और विद्यार्थियों को अन्य कॉलेजों में समायोजित किया जाएगा।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉलेज में शुरू से ही पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती नहीं हुई। इसी कारण यहां का परीक्षा परिणाम भी पिछले तीन वर्षों से अच्छा नहीं रहा। लोगों का आरोप है कि पहले सुविधाएं नहीं दी गईं और अब कम छात्र संख्या का हवाला देकर कॉलेज बंद किया जा रहा है।
5000 स्टाइपेंड भी नहीं मान रहे अभिभावक
सरकार ने मर्ज किए गए कॉलेजों के सेकेंड और फाइनल ईयर के विद्यार्थियों को 5000 रुपये मासिक स्टाइपेंड देने का फैसला लिया है। हालांकि अभिभावकों का कहना है कि शहरों में यह राशि केवल किराए में ही खर्च हो जाएगी और इससे आर्थिक बोझ कम नहीं होगा।
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कांग्रेस महासचिव विनोद जिंटा ने भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को ज्ञापन सौंपकर कॉलेज बंद नहीं करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि कुपवी जैसे दूरदराज क्षेत्रों में कॉलेज बंद होने से गरीब परिवारों और विशेषकर बेटियों की उच्च शिक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा।
