कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में मनरेगा के विकास कार्यों के लिए जारी सरकारी राशि के इस्तेमाल में अनियमितता सामने आई है। विकास खंड भेड़ू के तहत आने वाली रड़ा पंचायत में मनरेगा कार्यों से संबंधित शिकायत दर्ज की गई थी।

मनरगा कार्यों में गड़बड़ी

अब शिकायत की जांच के बाद तत्कालीन पंचायत प्रधान और दो पंचायत सचिवों को आर्थिक रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है। मामले में लोकपाल (मनरेगा) ने तीनों से कुल 61,320 रुपये की रिकवरी करने के आदेश जारी किए हैं।

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पूर्व प्रधान और सचिवों से रिकवरी

जांच में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर पूर्व प्रधान और सचिवों पर रिकवरी तय की गई है। जिसमें-

  • पूर्व पंचायत प्रधान लेखराज-  30,655 रुपये
  • पूर्व पंचायत सचिव मिशना देवी- 30,655 रुपये
  • पूर्व पंचायत सचिव प्रवीण कुमार- 10 रुपये जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं

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सर्विस बुक भी करवानी होगी जमा

संबंधित पंचायत सचिवों के खिलाफ की गई कार्रवाई को उनकी सर्विस बुक में दर्ज करने के आदेश भी दिए गए हैं। साथ ही तीनों को भविष्य में इस तरह की अनियमितता न करने की चेतावनी दी गई है।

जनवरी में की गई थी शिकायत

रड़ा पंचायत में मनरेगा कार्यों में कथित तौर पर सरकारी धन के सही इस्तेमाल को लेकर पंचायत के निवासी कर्म चंद और हिमाल चंद ने लोकपाल (मनरेगा) के समक्ष शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ताओं ने इस वर्ष 10 जनवरी और 16 जनवरी को अलग-अलग शिकायतें देकर मनरेगा कार्यों से संबंधित रिकॉर्ड और खर्च में गड़बड़ी की आशंका जताई थी।

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दस्तावेजों की हुई जांच

शिकायत में विभिन्न विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि और उसके इस्तेमाल से संबंधित जानकारी का उल्लेख किया गया था। शिकायत सामने आने के बाद मामले की जांच के लिए विकास खंड अधिकारी सुलह को जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद संबंधित कार्यों के रिकॉर्ड, तकनीकी गणना और पंचायत की ओर से विभाग को उपलब्ध करवाए गए दस्तावेजों की जांच की गई।

तकनीकी गणना और रिकॉर्ड में मिला अंतर

जांच प्रक्रिया के दौरान मनरेगा कार्यों से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया गया। इसमें तकनीकी सहायक की ओर से की गई गणना और पंचायत द्वारा ब्लॉक कार्यालय में जमा करवाए गए रिकॉर्ड के बीच अंतर पाया गया। जांच में तत्कालीन पंचायत प्रधान लेखराज, पंचायत सचिव मिशना देवी और पंचायत सचिव प्रवीण कुमार की भूमिका सामने आई।

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जांच अधिकारियों ने उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर सरकारी धन के इस्तेमाल में हुई अनियमितता को चिन्हित किया। इसके बाद मामले की रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित स्तर पर भेजी गई।

23 जुलाई को जारी हुआ रिकवरी आदेश

शिकायत पर कार्रवाई करते हुए लोकपाल (मनरेगा) ने 23 जुलाई 2026 को आदेश जारी किया। आदेश के तहत तत्कालीन पंचायत प्रधान और दोनों पंचायत सचिवों को संबंधित आर्थिक अनियमितता के लिए रिकवरी राशि जमा करवाने के निर्देश दिए गए।

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आदेश के मुताबिक पूर्व पंचायत प्रधान लेखराज को 30,655 रुपये, पूर्व पंचायत सचिव मिशना देवी को 30,655 रुपये और पूर्व पंचायत सचिव प्रवीण कुमार को 10 रुपये जमा करवाने होंगे। इस तरह तीनों से कुल 61,320 रुपये की रिकवरी निर्धारित की गई है।

सर्विस बुक में दर्ज होगी कार्रवाई

मामले में केवल आर्थिक रिकवरी तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी गई है। दोनों पंचायत सचिवों के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई को उनकी सर्विस बुक में दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका उद्देश्य भविष्य में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान वित्तीय और प्रशासनिक नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

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रिकवरी के आदेश जारी

शिकायतकर्ताओं कर्म चंद और हिमाल चंद ने लोकपाल की ओर से की गई कार्रवाई पर संतोष जताते हुए कहा कि मनरेगा जैसे ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में सरकारी धन के इस्तेमाल की निगरानी जरूरी है। उनका कहना है कि शिकायत के बाद मामले की जांच हुई और अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों से रिकवरी के आदेश जारी किए गए।

अधिकारियों ने रिकवरी आदेश की पुष्टि की

विकास खंड सुलह के अधीक्षक राजेश कुमार ने भी मामले में लोकपाल की ओर से जारी आदेश की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि रड़ा पंचायत में मनरेगा कार्यों से संबंधित गड़बड़ी की शिकायत की जांच के बाद पूर्व पंचायत प्रधान और दो पंचायत सचिवों के खिलाफ रिकवरी के निर्देश जारी हुए हैं।

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