शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सामने आए वृद्धावस्था पेंशन फर्जीवाड़े की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। छौहारा विकास खंड की तांगणू-जांगलिख पंचायत के इस मामले में अब और नए नाम सामने आए हैं।य़
50 से ज्यादा लोग उठा रहे लाभ
शुरुआती जांच में सामने आए मामलों के बाद जब विभाग ने रिकॉर्ड को और गहराई से खंगाला तो कई और संदिग्ध आवेदन सामने आए। अब ऐसे लोगों की संख्या 50 से अधिक पहुंच गई है, जिन पर नियमों के विपरीत वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त करने का संदेह है।
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हिमाचल में वृद्ध पेंशन घोटाला
जिला कल्याण विभाग के अनुसार जिन लोगों के नाम जांच में सामने आए हैं, उनकी पेंशन पर रोक लगा दी गई है। साथ ही मामले से जुड़े दस्तावेज और विभागीय जांच रिपोर्ट पुलिस को उपलब्ध करवा दी गई है, ताकि कानूनी जांच आगे बढ़ाई जा सके।
परिवार रजिस्टर की प्रतियों में मिली गड़बड़ियां
जांच के दौरान सबसे बड़ी अनियमितता उन दस्तावेजों में सामने आई, जिन्हें पेंशन के लिए उम्र प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया था। विभाग ने पाया कि कई आवेदनों के साथ लगाई गई परिवार रजिस्टर की प्रतियों और पंचायत में सुरक्षित मूल रिकॉर्ड के बीच अंतर मौजूद है।
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60 साल से कम उम्र के लोग ले रहे वृद्धावस्था पेंशन
अधिकारियों के अनुसार कुछ मामलों में रिकॉर्ड में काट-छांट और ओवरराइटिंग के संकेत भी मिले हैं। इससे संदेह और गहरा गया है कि पेंशन पात्रता हासिल करने के लिए उम्र संबंधी जानकारी में बदलाव किया गया हो सकता है।
शुरुआती जांच के बाद बढ़ा आंकड़ा
मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कई लोग निर्धारित आयु पूरी किए बिना वृद्धावस्था पेंशन का लाभ उठा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में 44 लोगों के नाम सामने आए थे। इसके बाद विभाग ने हाल ही में प्राप्त अन्य पेंशन आवेदनों की भी पड़ताल शुरू की।
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जांच में हुए कई बड़े खुलासे
इस अतिरिक्त जांच में छह से अधिक नए आवेदन ऐसे मिले, जिनमें प्रस्तुत दस्तावेजों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। इसके बाद संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 50 से अधिक हो गई।
शिकायत के बाद उठे सवाल
कुछ सप्ताह पहले सरकार के पास इस संबंध में लिखित शिकायत पहुंची थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मई के पहले सप्ताह में जांच के आदेश जारी किए गए। जांच की जिम्मेदारी जिला कल्याण अधिकारी कपिल शर्मा को सौंपी गई।
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रिकॉर्ड की जांच-पड़ताल
रिकॉर्ड की पड़ताल के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर चिड़गांव थाने में पहले ही कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा चुका है। इसके बाद सामने आए नए तथ्यों को भी पुलिस जांच का हिस्सा बनाया गया है।
पंचायत सचिव की भूमिका भी जांच के दायरे में
पूरे प्रकरण में पंचायत के तत्कालीन सचिव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि दस्तावेजों में कथित बदलाव किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में किए गए।
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पुलिस जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद यह तय किया जाएगा कि कथित रूप से गलत तरीके से प्राप्त की गई पेंशन राशि की वसूली कैसे की जाएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई होगी। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में और भी नाम सामने आ सकते हैं, जिससे फर्जीवाड़े का दायरा और बड़ा हो सकता है।
कैसे हुआ इतना बड़ा घोटाला?
इस पूरे मामले ने सत्यापन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमों के अनुसार, वृद्धावस्था पेंशन के लिए पंचायत स्तर पर परिवार रजिस्टर के आधार पर आवेदन किया जाता है और उसके बाद तहसील कल्याण अधिकारी कार्यालय से इसकी पुष्टि होती है। मगर यहां आरोप है कि पंचायत स्तर पर परिवार रजिस्टर की नकल में ही हेरफेर कर उम्र को गलत तरीके से दर्शाया गया।
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रिकॉर्ड देख उड़े होश
सूत्रों का कहना है कि इस गड़बड़ी में उस समय के पंचायत सचिवों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही है। अगर रिकॉर्ड में जन्म वर्ष 1972 से 1982 के बीच दर्ज हैं- तो यह स्पष्ट है कि संबंधित लाभार्थी अभी 60 वर्ष की आयु से काफी दूर हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिरकार किन आधारों पर इन आवेदनों को स्वीकृति मिली और भुगतान भी जारी रहा।
