बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा अक्सर शिक्षा के क्षेत्र में बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। मगर जिला बिलासपुर स्थित राजकीय महाविद्यालय में प्रशासनिक लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अनेकों छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एम.कॉम द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों को पूरे सेमेस्टर तक विश्वविद्यालय के नियमों के विपरीत गलत विषय पढ़ाया गया।
परीक्षा फॉर्म भरते विद्यार्थियों को चला पता
जानकारी के अनुसार यह बात तब सामने आई जब परीक्षा फॉर्म भरने के समय विद्यार्थियों को पता चला कि जिस विषय की पढ़ाई वे महीनों से कर रहे थे, वह उनके पाठ्यक्रम के अनुसार मान्य ही नहीं है।
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दरअसल, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की सीबीसीएस प्रणाली के तहत एम.कॉम सेकंड सेमेस्टर के विद्यार्थियों को एक जेनेरिक इलेक्टिव विषय चुनना होता है, जो कॉमर्स विभाग से अलग किसी अन्य विषय से संबंधित होना चाहिए। लेकिन छात्रों का आरोप है कि सत्र की शुरुआत में विभागीय स्तर पर उन्हें कॉमर्स का ही एक विषय आवंटित कर दिया गया और पूरे सेमेस्टर उसी की कक्षाएं लगती रहीं।
HPU के ऑनलाइन पोर्टल पर वह विषय उपलब्ध ही नहीं
छात्रों ने बताया कि उन्होंने नियमित रूप से कक्षाओं में भाग लिया, असाइनमेंट तैयार किए और उसी विषय को अपने पाठ्यक्रम का हिस्सा मानकर पढ़ाई जारी रखी। लेकिन मई 2026 में परीक्षा फॉर्म भरने के दौरान उन्हें बड़ा झटका लगा, जब विश्वविद्यालय के ऑनलाइन पोर्टल पर वह विषय उपलब्ध ही नहीं मिला। इसके बाद विद्यार्थियों को एहसास हुआ कि पूरे सेमेस्टर में उनसे एक गंभीर प्रशासनिक गलती हो गई है।
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मामला सामने आने पर संबंधित विभागाध्यक्ष से संपर्क किया गया। छात्रों का कहना है कि उन्हें बाद में अर्थशास्त्र विभाग का एक विषय चुनने की सलाह दी गई और आश्वासन दिया गया कि आंतरिक मूल्यांकन से जुड़ी समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। विभागाध्यक्ष के भरोसे पर छात्रों ने परीक्षा फॉर्म में नया विषय दर्ज तो कर दिया, लेकिन उसके बाद स्थिति और उलझ गई।
कॉलेज में कॉमर्स और अर्थशास्त्र विभाग के बीच असमंजस
बताया जा रहा है कि संबंधित विभागाध्यक्ष के तबादले के बाद छात्रों को उस नए विषय की न तो कोई नियमित कक्षा मिली और न ही उससे संबंधित कोई इंटरनल असेसमेंट कराया गया। ऐसे में अब सबसे बड़ी समस्या आंतरिक अंकों को लेकर खड़ी हो गई है। विद्यार्थी आशंकित हैं कि यदि मूल्यांकन नहीं हुआ तो उनके परीक्षा परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
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इस पूरे घटनाक्रम के बाद कॉलेज में कॉमर्स और अर्थशास्त्र विभाग के बीच भी असमंजस की स्थिति बन गई है। अर्थशास्त्र विभाग का कहना है कि जिन छात्रों ने उनकी कक्षाओं में भाग ही नहीं लिया और जिनका विभागीय मूल्यांकन नहीं हुआ, उन्हें नियमों के तहत अंक देना संभव नहीं है।
यह कहा कॉलेज प्रशासन ने
वहीं कॉलेज प्रशासन का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है और समाधान की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। कॉलेज प्रबंधन ने संबंधित शिक्षकों से बातचीत कर स्थिति स्पष्ट करने और छात्रों को नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।
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फिलहाल दर्जनों छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि गलती उनकी नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर हुई है, इसलिए उन्हें इसका खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए। छात्रों ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर ऐसा समाधान निकालने की मांग की है जिससे उनकी मेहनत और पूरा शैक्षणिक सत्र बर्बाद होने से बच सके।
