शिमला। किसानों को आसान और बिना गारंटी ऋण देने के सरकारी दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है। किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के तहत जहां नियमों में साफ लिखा है कि दो लाख रुपये तक के ऋण पर कोई गारंटी नहीं ली जाएगी।
KCC लोन में झोल
वहीं, राज्य में कई बैंक इन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। इस मामले पर अब राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक यानी नाबार्ड ने सख्त रुख अपनाया है। जिसके बाद बैंकों में हड़कंप मचा हुआ है।
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क्या है नियम?
नाबार्ड और भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड के तहत दो लाख रुपये तक के ऋण पर किसी भी तरह की गारंटी या जमानत नहीं ली जानी चाहिए। इसका उद्देश्य यह है कि छोटे और सीमांत किसानों को आसानी से बैंक से कर्ज मिल सके और वे साहूकारों के चंगुल में न फंसें।
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जमीनी हकीकत कुछ और
ग्रामीण इलाकों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि कई बैंक किसान क्रेडिट कार्ड जारी करते समय नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। किसान जमीन के कागज जमा कराने के बाद भी परेशान किए जा रहे हैं।
किसानों के साथ क्या गलत हो रहा है?
- जमीन के दस्तावेज देने के बावजूद बैंक गारंटर मांग रहे हैं
- अतिरिक्त संपत्ति गिरवी रखने की शर्त रखी जा रही है
- बार-बार बैंक बुलाकर किसानों को परेशान किया जा रहा है
- अनावश्यक कागजी औपचारिकताओं के कारण ऋण रोका जा रहा है
- छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा दिक्कत झेलनी पड़ रही है
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योजना का मकसद ही हो रहा कमजोर
राज्य में किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत शत-प्रतिशत कवरेज का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन अभी तक केवल करीब 32 फीसदी किसानों तक ही योजना पहुंच पाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसानों को समय पर बैंक से ऋण नहीं मिला तो वे मजबूरी में फिर से साहूकारों से कर्ज लेने को मजबूर होंगे, जिससे उनकी आर्थिक हालत और खराब हो सकती है।
नाबार्ड ने दी कार्रवाई की चेतावनी
नाबार्ड के महाप्रबंधक संदीप शर्मा ने इस मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने साफ कहा कि दो लाख रुपये तक के किसान क्रेडिट कार्ड ऋण पर किसी भी तरह की गारंटी नहीं ली जानी चाहिए। यदि बैंक शाखाएं नियमों का उल्लंघन कर रही हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिला और ब्लॉक स्तर पर बैंकों की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।
