शिमला। देशभर में आज दवा दुकानें बंद रहेगी- जिसका असर हिमाचल प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के बढ़ते चलन के विरोध में देशभर के केमिस्ट एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल पर रहेंगे।
हिमाचल में मरीजों को होगी परेशानी
इस हड़ताल का आह्वान ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स AICOD ने किया है। हड़ताल के चलते कई स्थानों पर दवा दुकानें बंद रहेंगी, जिससे मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
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क्यों बंद है मेडिकल शॉप?
संगठन के अनुसार देशभर के करीब 12.40 लाख से अधिक केमिस्ट और दवा वितरक इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। हड़ताल का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन माध्यम से हो रही अवैध और अनियंत्रित दवा बिक्री के खिलाफ आवाज उठाना है।
हिमाचल में भी बंद रहेंगी दवा दुकानें
इस देशव्यापी आंदोलन का असर हिमाचल प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। प्रदेश के दवा विक्रेताओं ने भी अपनी दुकानें बंद रखने का फैसला लिया है। कई जिलों में दवा विक्रेता संगठनों ने प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजकर ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है।
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मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा
हिमाचल के दवा विक्रेताओं का कहना है कि बिना उचित नियंत्रण के ऑनलाइन दवा बिक्री मरीजों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। उनका आरोप है कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना सत्यापित चिकित्सीय पर्चे के दवाओं की बिक्री और होम डिलीवरी कर रहे हैं।
क्या हैं दवा विक्रेताओं की मुख्य चिंताएं?
दवा विक्रेताओं का कहना है कि-
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भारी छूट देकर बाजार में असंतुलित प्रतिस्पर्धा पैदा की जा रही है।
- छोटे और लाइसेंसधारी केमिस्टों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
- ऑनलाइन माध्यम से एंटीबायोटिक दवाओं का दुरुपयोग बढ़ सकता है।
- बिना उचित जांच के नारकोटिक और प्रतिबंधित दवाओं की उपलब्धता का खतरा भी बना हुआ है।
- फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के जरिए दवाओं की खरीद आसान हो रही है, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
- बाजार में नकली दवाओं की आमद बढ़ने की आशंका लगातार बनी हुई है।
- जब मरीज और फार्मासिस्ट के बीच सीधा संवाद खत्म हो जाता है तो दवा के सही उपयोग और सुरक्षा पर भी असर पड़ता है।
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सरकार को भेजा जाएगा ज्ञापन
हड़ताल के दौरान विभिन्न जिलों में स्थानीय प्रशासन के माध्यम से PM नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजे जाएंगे। इसमें ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियंत्रण लगाने और छोटे दवा व्यापारियों के हितों की रक्षा करने की मांग उठाई जाएगी। दवा विक्रेता संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जा सकता है।
कुल्लू में भी उठी आवाज
जिला कुल्लू दवा विक्रेता संघ ने भी इस मुद्दे को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि ऑनलाइन दवा बिक्री पर तुरंत नियंत्रण नहीं लगाया गया तो भविष्य में आम जनता के लिए दवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। संघ के पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार से ई-फार्मेसी से जुड़े कुछ नोटिफिकेशन वापस लेने और अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की है।
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मरीजों को हो सकती है परेशानी
आज की हड़ताल के कारण कई इलाकों में मरीजों को जरूरी दवाएं लेने में दिक्कत आ सकती है। हालांकि, कुछ आपातकालीन सेवाएं सीमित स्तर पर जारी रह सकती हैं, लेकिन आम दवा दुकानों के बंद रहने से लोगों को पहले से जरूरी दवाएं लेने की सलाह दी गई है।
