किन्नौर। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां रूपी कंडे के दुर्गम इलाके में बुधवार देर रात अचानक आसमानी बिजली गिरने से 200 से ज्यादा भेड़-बकरियों की मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में पशुपालकों के बीच भी चिंता का माहौल है। इतनी बड़ी संख्या में पशुओं की मौत होने से पशुपालकों को लाखों रुपये का नुकसान होने की आशंका है। 

रात करीब 11 बजे अचानक बरपा कुदरत का कहर

जानकारी के अनुसार यह घटना बुधवार रात करीब 11 बजे की बताई जा रही है। उस समय रूपी कंडे के ऊंचे चरागाह क्षेत्र में पशुपालकों की भेड़-बकरियां एक जगह पर बैठी हुई थीं। रात के समय मौसम खराब था और इसी दौरान अचानक तेज गड़गड़ाहट के साथ आसमानी बिजली गिरी। बिजली इतनी तेज थी कि उसकी चपेट में आने से बड़ी संख्या में भेड़-बकरियों की मौके पर ही मौत हो गई।

 

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शैड में सो रहे थे पशुपालक, इसलिए बची जान

जिस समय आसमानी बिजली गिरी, उस दौरान पशुपालक अपने पशुओं के पास मौजूद थे, लेकिन वे कुछ दूरी पर बने एक शैड के अंदर सो रहे थे। बिजली सीधे भेड़-बकरियों के झुंड पर गिरी। गनीमत रही कि पशुपालक शैड के अंदर थे और बिजली की चपेट में नहीं आए। अगर पशुपालक उस समय झुंड के बीच या उसके बिल्कुल पास होते तो हादसा और भी गंभीर हो सकता था। 

रात के अंधेरे में 150 पशुओं की ही गिनती कर पाया पशुपालक

रूपी कंडे का इलाका काफी दुर्गम माना जाता है। यहां मोबाइल नेटवर्क की सुविधा भी ठीक नहीं है। हादसे के बाद पशुपालक गुमान सिंह के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि वह तुरंत अपने परिवार और प्रशासन को घटना की जानकारी कैसे दें। बताया गया कि नेटवर्क की तलाश में उन्हें कई किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ा।

 

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इसके बाद किसी तरह घटना की जानकारी अपने परिवार और पंचायत तक पहुंचाई गई। रूपी पंचायत के प्रधान मगला खोजान के अनुसार, रात के समय काफी अंधेरा होने के कारण गुमान सिंह केवल करीब 150 मृत भेड़-बकरियों की ही गिनती कर पाए। हालांकि, सुबह उजाला होने के बाद जब पूरे क्षेत्र की जांच होगी तो मृत पशुओं की संख्या 200 से भी ज्यादा होने की संभावना है।

दुर्गम इलाका होने के कारण राहत और जांच में भी दिक्कत

रूपी कंडे का इलाका काफी ऊंचाई और दुर्गम क्षेत्र में आता है। यहां तक पहुंचना भी आसान नहीं है। इसके अलावा मोबाइल नेटवर्क की सुविधा नहीं होने के कारण हादसे के बाद जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने में भी समय लगा।

 

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ऐसे में प्रशासन की टीम को घटनास्थल तक पहुंचने और नुकसान का जायजा लेने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पंचायत की ओर से घटना की जानकारी तुरंत प्रशासन को दी गई। सूचना मिलते ही प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके पर टीम भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

प्रशासन की टीम मौके के लिए रवाना

भावानगर की SDM नेहा नेगी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद वीरवार सुबह प्रशासन की एक संयुक्त टीम को मौके के लिए रवाना किया गया है। टीम का मुख्य उद्देश्य घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे नुकसान का जायजा लेना और मृत भेड़-बकरियों की संख्या की पुष्टि करना है।

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एसडीएम ने बताया कि जिस इलाके में यह घटना हुई है, वहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से मौके पर गई टीम से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है। टीम के वापस लौटने के बाद ही हादसे से हुए वास्तविक नुकसान की पूरी जानकारी सामने आएगी।

लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान

एक साथ 200 से ज्यादा भेड़-बकरियों की मौत होने से पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। पशुपालकों के लिए ये जानवर उनकी आजीविका का बड़ा साधन होते हैं। ऐसे में इतने पशुओं का एक साथ मारा जाना उनके लिए बड़ा झटका है।

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फिलहाल नुकसान की सही रकम का आकलन प्रशासन की टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। पशुपालकों को उम्मीद है कि प्रशासन की ओर से नुकसान का उचित आकलन किया जाएगा और उन्हें नियमानुसार आर्थिक मदद दी जाएगी।

उजाला होने के बाद सामने आएगी मृत पशुओं की सही संख्या

रात में अंधेरा होने के कारण अभी तक सभी मृत भेड़-बकरियों की गिनती नहीं हो पाई है। मौके पर मौजूद पशुपालक ने करीब 150 पशुओं की गिनती की थी, लेकिन पूरे झुंड में मृत पशुओं की संख्या 200 से अधिक होने का अनुमान है।

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पशुपालकों के लिए बड़ा झटका

इस प्राकृतिक आपदा ने पशुपालकों को बड़ा झटका दिया है। एक ही रात में इतने पशुओं की मौत होने से उनकी मेहनत और कमाई पर भी असर पड़ा है। हालांकि, घटना में किसी इंसान की जान नहीं गई, जो इस पूरे हादसे में सबसे बड़ी राहत की बात है। प्रशासन की टीम के लौटने के बाद नुकसान की पूरी तस्वीर साफ होगी। इसके बाद प्रभावित पशुपालकों को नियमानुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।