बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में पशुपालन जीवन का अभिन्न हिस्सा है। अधिकतर घरों में लोग बैल, गाय, बकरी जैसे पशु पालते हैं और इन्हें परिवार का सदस्य मानकर सेवा करते हैं। खासकर जब पशु बीमार हो जाए तो लोग दिन-रात उनकी सेवा में लगे रहते हैं। लेकिन यह सेवा भाव कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो जाता है। ऐसा ही एक मामला सूबे के बिलासपुर जिले से सामने आया है।

बैल के नीचे दबने से महिला की मौत

यहां पर श्री नयना देवी जी क्षेत्र के ओयल गांव में एक महिला की अपने ही बैल के नीचे दबने के कारण मौत हो गई है। घटना के वक्त महिला अपने बीमार बैल को जंगल से घर लाने गई हुई थी। इस घटना के बाद पूरे गांव में माहौल गमगीन बना हुआ है।

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जंगल में चरने छोड़े थे पशु

परिजनों ने बताया कि बीते कल महिला ने अपने पशुओं को घर के पास के जंगल में चरने के लिए छोड़ा हुआ था। दोपहर बाद वो जंगल से पशुओं को वापस लाने गई थी। ऐसे में पहले उसने कुछ पशुओं को घर छोड़ा।

बीमार बैल के नीचे दबी महिला

उसके बाद वो अपने बीमार बैल को लाने के लिए वापस जंगल गई। हालांकि, काफी देर तक महिला वापस घर नहीं आई- तो उसका पति जंगल की ओर उसे ढूंढने निकल पड़ा। इस दौरान उसे उसकी पत्नी जंगल में बैल के नीचे दबी हुई दिखाई दी।

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पूरे गांव में माहौल गमगीन

उसने कड़ी मशक्कत कर किसी तरह पत्नी को बैल के नीचे से निकाला। मगर तब तक काफी देर हो चुकी थी। बैल के नीचे दबने से महिला की मौत हो चुकी थी। मृतका की पहचान 35 वर्षीय परमजीत पत्नी जोगिंद्र सिंह के रूप में हुई है। इस घटना के बाद पूर गांव में दुख का माहौल है।

जानलेवा साबित होती सेवा

विदित रहे कि, हाल के वर्षों में प्रदेश के कई जिलों से ऐसे मामले सामने आए हैं-जहां लोग बीमार या कमजोर पशु को संभालते हुए उनकी चपेट में आ गए और गंभीर रूप से घायल हो गए या उनकी मौत हो गई। विशेषकर बैल और गाय जैसे भारी शरीर वाले पशु जब बीमार होकर जमीन पर गिरते हैं, तो कई बार उनके नीचे बैठे या सहारा दे रहे व्यक्ति को कुचल देते हैं।

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ऐसे मामलों में अधिकांश बार जानवर अचानक गिर पड़ता है या उठने के प्रयास में अपना संतुलन खो देता है। बुजुर्ग, महिलाएं या बच्चे जो उनकी सेवा में लगे होते हैं, वे समय पर बच नहीं पाते और गंभीर हादसे का शिकार हो जाते हैं। कई घटनाएं ऐसी भी होती हैं, जब व्यक्ति पशु के नीचे दबने से बेहोश हो जाता है और समय पर मदद न मिलने से उसकी जान चली जाती है।

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