ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया हैए जहां एक ही झटके में 40 परिवारों के सिर से छत छिन गई। शहर के पुराना होशियारपुर रोड पर स्थित प्रवासी मजदूरों की बस्ती उस समय चीख.पुकार और अफरा-तफरी के केंद्र में बदल गई, जब यहां अचानक भीषण आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि एक साथ 40 परिवारों के आशियाने उनकी आंखों के सामने जलकर राख के ढेर में तब्दील हो गए। घटना के समय चारों तरफ सिर्फ धुआं और लोगों की बेबसी ही नजर आ रही थी।
तेज हवाओं ने आग में घी का काम किया
यह आग दोपहर के वक्त उस समय लगी जब अधिकांश मजदूर अपने काम पर गए हुए थे। 40 झुग्गियों में अचानक लगी आग के बाद मौके पर भारी अफरा.तफरी मच गई। जैसे ही आग की खबर फैली, प्रवासी लोग अपने काम छोड़कर बदहवास हालत में मौके पर पहुंचे और अपनी जान जोखिम में डालकर सामान निकालने का प्रयास करने लगे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, आग ने तेज हवाओं के चलते कुछ ही मिनटों में भयानक रूप धारण कर लिया और आग की लपटें तथा धुएं का गुब्बार पूरे आसमान में दिखने लगा। काले धुएं का यह मंजर इतना खौफनाक था कि इसे कई किलोमीटर दूर से भी साफ देखा जा सकता था।
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एक चिंगारी ने पूरी बस्ती को जलाकर कर किया राख
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला। तेज हवाओं ने आग को और भड़काने का काम किया, जिससे कुछ ही पलों में पूरी झुग्गी बस्ती इसकी चपेट में आ गई। उस समय अधिकांश प्रवासी मजदूर अपने-अपने काम पर गए हुए थे, लेकिन जब तक वह वापस लौटे उनका सब कुछ जलकर राख हो गया था।
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दमकल विभाग ने संभाला मोर्चा
सूचना मिलते ही दमकल विभाग हरकत में आया और कई फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक अधिकांश झुग्गियां जलकर खाक हो चुकी थीं। इस आगजनी में भले ही किसी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन कई परिवारों का सब कुछ स्वाहा हो गया और वे खुले आसमान के नीचे आ गए।
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पुलिस ने भी शुरू की मामले की जांच
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। डीएसपी मुख्यालय अजय ठाकुर के नेतृत्व में पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है और संबंधित विभाग मामले की जांच में जुटे हुए हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि गर्मियों के मौसम में बढ़ती गर्मी और लापरवाही के चलते इस तरह की आगजनी की घटनाएं कब तक गरीब और मजदूर वर्ग की जिंदगी को प्रभावित करती रहेंगी। फिलहाल पीड़ित परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने जीवन को दोबारा पटरी पर लाने की है।
