शिमला। अक्सर देखा जाता है कि राज्य सरकारें अपने प्रदेश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए निवेशकों को आकर्षित करती हैं और नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए विभिन्न प्रकार की रियायतें भी प्रदान करती हैं। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार भी पिछले कुछ समय से निवेश बढ़ाने और रोजगार सृजन के उद्देश्य से उद्योगों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही थी। लेकिन अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने ऐसा फैसला लिया है जिसने उद्योग जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग को प्राथमिकता देते हुए हिमाचल प्रदेश में नए इथेनॉल और सरिया (स्टील) उद्योगों की स्थापना पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्णय लिया है। इतना ही नहीं, पहले से संचालित इकाइयों के विस्तार संबंधी प्रस्तावों को भी मंजूरी नहीं दी जाएगी।
आखिर सुक्खू सरकार ने क्यों लिया ऐसा फैसला
प्रदेश सरकार का मानना है कि कुछ उद्योग ऐसे हैं जिनका संसाधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जबकि बदले में प्रदेश को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। इसी सोच के तहत सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य में प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि उद्योगों के कारण जल स्रोतों, भूजल स्तर और ऊर्जा व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव पड़ता है तो इसका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है।
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बिजली और पानी की भारी खपत बनी चिंता का कारण
सरिया और इथेनॉल उद्योगों को लेकर सरकार की सबसे बड़ी चिंता इनकी अत्यधिक संसाधन खपत है। जानकारी के अनुसार एक सरिया उद्योग को संचालन के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है, जिससे विद्युत व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। वहीं इथेनॉल उत्पादन इकाइयों में पानी की खपत बेहद अधिक होती है। प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में पहले से संचालित इकाइयों के कारण भूजल स्तर प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में सरकार भविष्य में इस प्रकार के दबाव को रोकना चाहती है।
सिंगल विंडो क्लीयरेंस बैठक में लिया निर्णय
हाल ही में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित सिंगल विंडो क्लीयरेंस कमेटी की बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। उद्योग विभाग के माध्यम से कुछ कंपनियों ने अपने प्रोजेक्ट्स के विस्तार की अनुमति मांगी थी, लेकिन सरकार ने इन प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया। बैठक के दौरान अधिकारियों ने सरकार को अवगत कराया कि इन उद्योगों से प्रदेश को सीमित आर्थिक लाभ मिलता है, जबकि प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाला दबाव काफी अधिक है।
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संसाधन बचाने वाले उद्योगों को प्राथमिकता
प्रदेश सरकार अब ऐसी औद्योगिक नीति की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसमें कम संसाधनों का उपयोग करने वाले और अधिक रोजगार देने वाले उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य ऐसे निवेशकों को आकर्षित करना है जो पर्यावरण के अनुकूल तकनीक अपनाएं, स्थानीय युवाओं को रोजगार दें और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सकारात्मक भूमिका निभाएं।
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प्रदेश की औद्योगिक नीति में बड़ा बदलाव
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के इस फैसले को प्रदेश की औद्योगिक नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह पहली बार है जब सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि केवल निवेश लाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि उद्योगों का प्रभाव पर्यावरण, जल संसाधनों और स्थानीय समुदायों पर सकारात्मक हो। सरकार के इस निर्णय के बाद अब हिमाचल प्रदेश में नए इथेनॉल और सरिया उद्योगों की स्थापना का रास्ता लगभग बंद हो गया है और भविष्य में केवल उन्हीं परियोजनाओं को प्राथमिकता मिलने की संभावना है जो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की कसौटी पर खरी उतरेंगी।
