शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों के बीच राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 22 मई को कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक बुला ली है। यह बैठक प्रदेश सचिवालय स्थित शिखर सम्मेलन हॉल में सुबह 11 बजे आयोजित होगी। चुनावी आचार संहिता लागू होने के बावजूद बुलाई गई इस बैठक को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

हालांकि सरकार की ओर से अभी तक बैठक का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि बैठक में आम जनता और कर्मचारियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। खासकर प्रदेश में बढ़ती महंगाई, पेट्रोल.डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी और कर्मचारियों के लंबित वित्तीय लाभों को लेकर बड़े फैसलों की संभावना जताई जा रही है। हालांकि सरकार बिना चुनाव आयोग की अनुमति के किसी तरह की कोई भी घोषणा नहीं कर सकेगी।

 

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कर्मचारियों के एरियर और डीए पर चर्चा

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री सुक्खू ने हाल ही में वित्त विभाग के अधिकारियों को कर्मचारियों के लंबित एरियर और महंगाई भत्ते (डीए) को जारी करने के लिए आवश्यक धनराशि का आकलन करने के निर्देश दिए थे। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। प्रदेश के लाखों कर्मचारी और पेंशनर लंबे समय से डीए और एरियर को लेकर सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि निर्वाचन आयोग से मंजूरी मिलती है तो सरकार कर्मचारियों के हित में कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कर सकती है।

 

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पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर भी नजर

हाल ही में देशभर में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के बाद हिमाचल में भी इसका असर महसूस किया जा रहा है। परिवहन, निर्माण कार्यों और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत बढ़ने से जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।

 

ऐसे में माना जा रहा है कि सुक्खू सरकार कैबिनेट बैठक में बढ़ती महंगाई और उसके प्रभावों पर भी मंथन कर सकती है। प्रदेश में सड़क निर्माण और विकास कार्यों पर बढ़ती लागत को लेकर भी सरकार के भीतर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

 

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आचार संहिता के बीच निर्वाचन आयोग की मंजूरी जरूरी

चूंकि प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर आदर्श आचार संहिता लागू है, इसलिए सरकार किसी भी बड़े निर्णय या घोषणा से पहले राज्य निर्वाचन आयोग की अनुमति लेगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार प्रशासनिक और जनहित से जुड़े फैसलों को प्राथमिकता दे सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग की कैबिनेट शाखा द्वारा बैठक को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया गया है।

 

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चुनावी माहौल के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल

कैबिनेट बैठक ऐसे समय में होने जा रही है जब प्रदेश में शहरी निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर माहौल पूरी तरह गर्म है। 17 मई को प्रदेश के 51 शहरी निकायों में मतदान होना है, जबकि इसके बाद 26, 28 और 30 मई को पंचायत चुनाव संपन्न होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल के बीच होने वाली यह कैबिनेट बैठक कई मायनों में अहम साबित हो सकती है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सुक्खू सरकार बैठक में जनता और कर्मचारियों को राहत देने के लिए कौन से बड़े फैसले लेती है।

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