शिमला। हिंदू समाज में नवरात्रि का महत्वपूर्ण स्थान है। नवरात्रि के 9 दिन जगह-जगह पंडाल लगते हैं जहां मां की मूर्ति स्थापित की जाती है। नवरात्रि के हर दिन मां की पूजा की जाती है। इन 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां भगवती इन दिनों धरती पर आती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
मां सिद्धिदात्री की पूजा आज
नवरात्रि में मां के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। आखिरी यानी नौवीं नवरात्रि पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां कमल पर विराजमान हैं और उनकी चार भुजाएं हैं। मां ने अपने एक हाथ में शंख, दूसरे में गदा, तीसरे में कमल व चौथे में चक्र धारण किया है। मां सिद्धिदात्री मां दुर्गा की तरह सिंह की सवारी करती हैं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में फिर लौटेगी बारिश- नया अपडेट आया सामने: जानें पूरी भविष्यवाणी
ऐसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा
- सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करें
- पूजा स्थल की साफ-सफाई कर गंगाजल का छिड़काव करें
- इसके बाद मां सिद्धिदात्री की तस्वीर स्थापित करें
- अब मां को रोली, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, फूल आदि अर्पित करें
- भोग के रूप में मां को हलवा, पूड़ी और चने अर्पित करें
- दीपक जलाकर माता की आरती करें और सभी में प्रसाद बांटें
- 9 कन्याओं का पूजन कर अपने व्रत का पारण करें और हवन भी करें
यह भी पढ़ें : हिमाचल के दुकानदार की बेटी बनी नर्सिंग ऑफिसर, देशभर में हासिल किया 65वां रैंक
महिषासुर से परेशान थे देवता
कहा जाता है कि एक वक्त था जब सभी देवता महिषासुर के अत्याचारों से परेशान थे। ऐसे में ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने अपने तेज से मां सिद्धिदात्री को उत्पन्न किया था।
भगवान शिव की कठिन साधना
मान्यता है कि शिव भगवान ने मां की कठिन साधना की। इससे उन्हें अणिमा, महिमा, गरिमा जैसी 8 सिद्धियां प्राप्त हुईं। इसके बाद शिव भगवान का आधा शरीर देवी का हो गया था। इसीलिए उन्हें अर्धनारीश्वर कहा गया।
