शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के आज अंतिम दिन भी माहौल बेहद गरमाया रहा। प्रश्नकाल के दौरान देहरा उपचुनाव और कांगड़ा बैंक से महिला मंडलों को धनराशि जारी करने का मामला उठते ही सदन में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और अंततः वॉकआउट कर दिया।

उपचुनाव के दौरान दी गई थी धनराशि

हमीरपुर से निर्दलीय विधायक आशीष शर्मा ने सदन में सवाल उठाया कि आखिर देहरा उपचुनाव के दौरान कांगड़ा बैंक से किन परिस्थितियों में महिला मंडलों को राशि जारी की गई? इस पर सरकार ने जवाब देते हुए कहा कि मामले की जांच की जा रही है और अभी विस्तृत जानकारी एकत्र की जा रही है।

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लेकिन विधायक ने सदन में आरटीआई के तहत प्राप्त दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए, जिसमें स्पष्ट उल्लेख था कि महिला मंडलों को उपचुनाव के दौरान धनराशि दी गई थी। इस खुलासे के बाद विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर जानकारी छिपाने और सदन को गुमराह करने के आरोप लगाए।

जयराम ठाकुर का आरोप

नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार लोकतांत्रिक परंपराओं को ठेस पहुंचा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस समय देहरा उपचुनाव हो रहा था, तब मुख्यमंत्री की पत्नी स्वयं प्रत्याशी थीं।

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उसी दौरान आचार संहिता लागू रहने के बावजूद महिला मंडलों को 50-50 हजार रुपये की राशि दी गई। यही नहीं, करीब एक हजार महिलाओं के खातों में 4,500 रुपये डालकर वोटरों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

सदन में जवाब देने से क्यों बच रही सरकार

जयराम ठाकुर ने कहा कि जब आरटीआई से यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, तो सरकार सदन में जवाब देने से क्यों बच रही है? यह दर्शाता है कि सरकार असुविधाजनक प्रश्नों से भाग रही है और विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। वहीं, विपक्षी विधायकों ने इस मुद्दे को "वोट चोर अभियान" करार देते हुए कहा कि कांग्रेस जिस तरह देशभर में भाजपा पर आरोप लगा रही है, उसी प्रकार खुद हिमाचल में वोट की खरीद-फरोख्त में लिप्त रही है।

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