शिमला। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी ने प्रदेश का सियासी तापमान बढ़ा दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके जगत प्रकाश नड्डा के हालिया बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गए हैं। केंद्र से मिलने वाले फंड और हिमाचल के वित्तीय अधिकारों को लेकर दोनों दलों के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है।
केंद्र सरकार को श्वेत पत्र जारी करने की चुनौती
दरअसल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के एक बयान ने हिमाचल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। केंद्र से मिलने वाले फंड और उसके उपयोग को लेकर नड्डा द्वारा राज्य सरकार पर उठाए गए सवालों के बाद कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है।
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कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं ठियोग विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने केंद्र सरकार से श्वेत पत्र जारी कर हिमाचल को दी गई आर्थिक सहायता का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की है। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं।
विकास कार्य हो रहे प्रभावित
कुलदीप सिंह राठौर का कहना है कि, भाजपा यह स्पष्ट करे कि पिछले वर्षों में हिमाचल प्रदेश को केंद्र से कितनी राशि मिली और उसमें से कितनी रकम वास्तव में प्रदेश तक पहुंची। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं के दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है।
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कुलदीप राठौर ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता होने के बावजूद जेपी नड्डा यह बताएं कि हिमाचल के लिए केंद्र से कौन-कौन सी बड़ी परियोजनाएं मंजूर करवाई गईं। उन्होंने दावा किया कि राज्य को उसके वित्तीय अधिकारों और विभिन्न मदों के तहत मिलने वाली राशि समय पर उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
राज्य सरकार की कार्यशैली पर की थी टिप्पणी
दरअसल, हाल ही में शिमला दौरे के दौरान जेपी नड्डा ने राज्य सरकार पर केंद्र से मिलने वाली आर्थिक सहायता के उपयोग को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार ने हर संभव मदद दी है, लेकिन प्रदेश सरकार उपलब्ध कराए गए संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने में सफल नहीं रही। नड्डा ने प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी राज्य सरकार की कार्यशैली पर टिप्पणी की थी।
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इसके जवाब में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में हिमाचल की मदद कर रही है तो उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि जीएसटी और अन्य केंद्रीय मदों के तहत प्रदेश को मिलने वाली राशि को लेकर भी कई बार देरी और असमानता देखने को मिली है।
