#अपराध
June 15, 2026
हिमाचल में बड़ा पेंशन घोटाला! मृ*तकों के खातों से निकाले लाखों, CBI तक पहुंचा मामला
ये पैसा लाभार्थियों को मिलने वाली पेंशन का हिस्सा था
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से सरकारी धन के कथित गबन का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस मामले ने डाक विभाग और सरकारी लाभ वितरण प्रणाली की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, शिमला ने एक शाखा डाकपाल के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि मृत लाभार्थियों के पेंशन खातों से लाखों रुपये की राशि अवैध रूप से निकाली गई और उसका निजी लाभ के लिए उपयोग किया गया।
जानकारी के अनुसार, डाक मंडल धर्मशाला के अंतर्गत आने वाले मंड मंजवां शाखा डाकघर में तैनात शाखा डाकपाल होशियार सिंह पर 19 मृत लाभार्थियों के खातों से पेंशन राशि निकालने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि यह कथित गबन जून 2024 से सितंबर 2025 के बीच किया गया। मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में भी इसकी व्यापक चर्चा हो रही है।
जांच एजेंसियों को मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिन लाभार्थियों की मृत्यु हो चुकी थी, उनके खातों में सरकारी पेंशन की राशि जमा होती रही। आरोप है कि इन खातों से व्यवस्थित तरीके से धनराशि निकाली गई। जांच में सामने आया है कि कुल 9.02 लाख रुपये की राशि खातों से निकाली गई- जो सरकारी योजनाओं के तहत लाभार्थियों को मिलने वाली पेंशन का हिस्सा थी।
आरोप यह भी है कि निकासी के लिए फर्जी प्रपत्र तैयार किए गए और अंगूठों के नकली निशानों का इस्तेमाल किया गया। इस तरीके से लेनदेन को वैध दिखाने का प्रयास किया गया ताकि लंबे समय तक किसी को संदेह न हो।
सूत्रों के अनुसार, शिकायत और प्रारंभिक सूचनाएं मिलने के बाद CBI ने मामले का गोपनीय सत्यापन शुरू किया। इस दौरान वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में पर्याप्त आधार मिलने के बाद केंद्रीय एजेंसी ने औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज कर ली।
मामले की जांच आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी CBI की विशेष टीम को सौंपी गई है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे प्रकरण की हर स्तर पर जांच की जाएगी और अगर किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
CBI अब बैंक खातों, डाकघर के वित्तीय रिकॉर्ड, भुगतान रजिस्टरों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि धनराशि निकालने की प्रक्रिया कैसे संचालित की गई और उसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि क्या निगरानी व्यवस्था में कोई ऐसी खामी थी, जिसकी वजह से कथित गबन लंबे समय तक पकड़ में नहीं आ सका। जांच एजेंसी विभागीय स्तर पर बरती गई संभावित लापरवाही की भी समीक्षा कर रही है।
इस मामले ने सरकारी लाभ वितरण प्रणाली की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाभार्थियों के निधन के बाद भी खातों में पेंशन जारी रहती है और उसके बाद धनराशि की निकासी होती है, तो यह निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया में कमियों की ओर संकेत करता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में डाकघरों के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को पेंशन और अन्य सरकारी सहायता राशि वितरित की जाती है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं आम लोगों के विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।
यह मामला एक बार फिर इस आवश्यकता को रेखांकित करता है कि सरकारी योजनाओं से जुड़ी वित्तीय प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता लाई जाए। लाभार्थियों के रिकॉर्ड का नियमित सत्यापन, डिजिटल निगरानी तंत्र को मजबूत करना और समय-समय पर ऑडिट कराना ऐसे मामलों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
फिलहाल, CBI की जांच जारी है और एजेंसी मामले से जुड़े सभी तथ्यों को खंगाल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कथित गबन की पूरी साजिश कैसे रची गई और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।