शिमला। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन गई है। भाजपा जहां नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है, वहीं कांग्रेस आलाकमान लगातार मंथन के दौर में फंसी हुई है। चर्चाएं तो कई हैं, मगर अंतिम फैसला अब तक अटका हुआ है।
गुटबाज़ी से जूझ रही कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के स्थान पर नया अध्यक्ष नियुक्त करने की चर्चाएं पिछले कई हफ्तों से चल रही हैं। पहले अनुभवी नेताओं के नाम चले, फिर युवाओं को मौका देने की बात होने लगी। मगर भीतरखाने की गुटबाज़ी इस निर्णय को टालती जा रही है। आलाकमान ने प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग चरणों में बातचीत की, लेकिन अंतिम सहमति बनती नहीं दिख रही।
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फिर से प्रतिभा सिंह पर टिक सकती है पार्टी की नज़र?
ऐसे में अब एक बार फिर यह लगभग तय माना जा रहा है कि जब तक गुटों में सहमति नहीं बनती, तब तक पार्टी की कमान प्रतिभा सिंह के पास ही बनी रह सकती है। खुद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी सार्वजनिक मंचों पर प्रतिभा सिंह के नेतृत्व का समर्थन किया है। आलाकमान में भी उनके नाम पर असहमति नहीं मानी जा रही।
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इन नामों ने पकड़ी रफ्तार
पार्टी अध्यक्ष बनने की दौड़ में पूर्व अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर, वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर, कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह, संजय अवस्थी, और जातीय समीकरणों के लिहाज़ से पहली बार के विधायक विनोद सुल्तानपुरी जैसे नाम लगातार चर्चा में हैं। हालांकि, बीते कुछ दिनों से विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। उनका युवा चेहरा, समर्पण और संगठन पर पकड़ उन्हें एक संभावित दावेदार बनाते हैं।
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खर्च का गणित भी बना रोड़ा
इस पूरे घटनाक्रम में एक और मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। अध्यक्ष पद संभालने के बाद होने वाला खर्च चर्चा में है। सूत्रों की मानें तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को सक्रिय रूप से प्रदेश भर का दौरा करने के लिए हर महीने लगभग 7 लाख रुपये का खर्च आता है। अभी तक यह खर्च खुद वर्तमान अध्यक्ष प्रतिभा सिंह वहन कर रही हैं। कई नए दावेदारों के लिए यह व्यावहारिक चुनौती भी बनकर सामने आया है।
