मंडी। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश और उससे उपजी प्राकृतिक आपदाओं ने जहां आम जनता को गहरे संकट में डाल दिया है, वहीं अब राहत राशि को लेकर प्रदेश में सियासत भी गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि आपदा राहत के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है।

सराज विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार जो आपदा प्रभावितों को 7 लाख रुपये की राहत राशि देने की बात कर रही है, उसमें से करीब साढ़े 4 लाख रुपये केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि राज्य सरकार खुद कितना योगदान दे रही है और किस हद तक वह सचमुच प्रभावितों के साथ खड़ी है।

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राहत पैकेज में केंद्र का बड़ा हिस्सा

जयराम ठाकुर ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार द्वारा 93 हजार घरों की मंजूरी दी गई है। हर आवास पर केंद्र से मिलने वाली ₹1.5 लाख की सहायता राशि इस पैकेज में शामिल है। इसके अतिरिक्त आपदा राहत के रूप में ₹1.5 लाख केंद्र द्वारा अलग से दिए जा रहे हैं, और ₹1.5 लाख श्रम मंत्रालय की ओर से मजदूर परिवारों को मिल रहे हैं।

 

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उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर साढ़े 4 लाख रुपये की राशि तो केंद्र से आ रही है, जबकि राज्य सरकार इसे अपने राहत पैकेज के रूप में प्रचारित कर रही है। "प्रदेश सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसमें उसकी अपनी हिस्सेदारी कितनी है।

मुख्यमंत्री झूठ बोलना बंद करें

जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से आग्रह किया है कि वे राहत पैकेज के नाम पर "झूठ बोलना बंद करें" और जनता को भ्रमित करने की बजाय उनके दर्द को समझें। उन्होंने सरकार से पारदर्शी तरीके से राहत देने और जल्द से जल्द सहायता राशि पहुंचाने की मांग की। ठाकुर ने यह भी कहा कि यह मुद्दा आगामी विधानसभा सत्र में प्रमुखता से उठाया जाएगा ताकि सरकार को जवाबदेह ठहराया जा सके।

प्रशासन की लापरवाही से पीड़ित हो रहे लोग

सराज क्षेत्र के दौरे के दौरान जयराम ठाकुर ने आपदा प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि कई परिवारों के मकान पूरी तरह से जर्जर और असुरक्षित हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा अब तक उन्हें "पूरी तरह क्षतिग्रस्त" घोषित करने की रिपोर्ट तक नहीं बनाई गई है। इससे प्रभावित लोग न तो पूरी सहायता ले पा रहे हैं और न ही पुनर्निर्माण कार्य शुरू कर पा रहे हैं। लोगों ने बमुश्किल जान बचाई है, लेकिन अब वे सरकारी उदासीनता के शिकार बन रहे हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि संकट की इस घड़ी में सरकार कागजी घोषणाओं तक सीमित है," 

 

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राजनीतिक आरोपों के बीच पीड़ितों की उम्मीदें अधूरी

प्रदेश में हो रही सियासी बयानबाज़ी के बीच आपदा प्रभावित लोग आज भी बुनियादी राहत का इंतजार कर रहे हैं। एक ओर सरकार अपने राहत प्रयासों को "ऐतिहासिक" बता रही है, वहीं विपक्ष इसे "मिथ्या प्रचार" करार दे रहा है। ऐसे में वास्तविक राहत कितनी और कब तक मिलेगी, यह सवाल हर पीड़ित के चेहरे पर साफ झलक रहा है।

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आपदा राहत को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। जहां सरकार अपने कदमों को सराहनीय बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे ‘केंद्र की मदद का श्रेय खुद लेने’ की कोशिश बताया है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में सरकार इस आलोचना का जवाब कैसे देती है और जनता को कितनी पारदर्शी और समयबद्ध राहत उपलब्ध करवा पाती है।

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