कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों के बाद अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेशभर में भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों को शीर्ष पदों तक पहुंचाने के लिए रणनीति बनाने में जुटी हुई हैं। इसी बीच कुल्लू जिले से एक ऐसा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है जिसने सभी को हैरान कर दिया है।

 

ब्लॉक समिति कुल्लू में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार ने कब्जा जमा लिया। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद अब यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है और भाजपा भी हार के कारणों को तलाशने में जुट गई है।

अध्यक्ष पद पर भाजपा ने लहराया परचम

18 सदस्यीय ब्लॉक समिति कुल्लू में अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान भाजपा समर्थित उम्मीदवार यमुना ठाकुर ने जीत दर्ज की। उन्हें 10 वोट मिले] जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार को 8 मत प्राप्त हुए। इस जीत के साथ अध्यक्ष पद पर भाजपा ने अपनी मजबूत पकड़ साबित कर दी। भाजपा खेमे में अध्यक्ष पद की जीत को लेकर उत्साह का माहौल रहा] क्योंकि पार्टी समर्थित उम्मीदवार ने बहुमत के आधार पर स्पष्ट जीत हासिल की।

 

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उपाध्यक्ष पद पर फंसा मुकाबला

हालांकि असली रोमांच उपाध्यक्ष पद के चुनाव में देखने को मिला। यहां भाजपा और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर रही। मतदान के बाद दोनों उम्मीदवारों को बराबर 9-9 वोट मिले, जिससे मुकाबला पूरी तरह रोचक हो गया। बराबरी की स्थिति बनने के बाद चुनावी नियमों के तहत फैसला पर्ची सिस्टम के जरिए किया गया। किस्मत के इस खेल में कांग्रेस समर्थित सुंदर ठाकुर के नाम की पर्ची निकली और उन्हें उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित कर दिया गया।

बहुमत के बावजूद कैसे फिसला पद?

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब ब्लॉक समिति में भाजपा समर्थित सदस्यों की संख्या अधिक थी, तो फिर उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार कैसे जीत गया। राजनीतिक जानकार इसे क्रॉस वोटिंग, अंदरूनी असंतोष या रणनीतिक चूक से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष ने खुलकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन चुनावी नतीजों ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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भाजपा करेगी हार के कारणों की समीक्षा

उपाध्यक्ष पद पर मिली हार के बाद भाजपा नेतृत्व भी सक्रिय हो गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि अध्यक्ष पद पर जीत के बावजूद उपाध्यक्ष पद हाथ से निकलना गंभीर विषय है। ऐसे में यह पता लगाया जाएगा कि आखिर बहुमत होने के बाद भी समीकरण कैसे बिगड़े। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि क्या मतदान के दौरान किसी सदस्य ने पार्टी लाइन से हटकर वोट किया या फिर अन्य कोई कारण रहा, जिसकी वजह से परिणाम भाजपा की अपेक्षा के अनुरूप नहीं आया।

 

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शपथ ग्रहण के साथ पूरी हुई प्रक्रिया

चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को पद एवं गोपनीयता की शपथ भी दिलाई गई। इसके साथ ही ब्लॉक समिति कुल्लू में नई कार्यकारिणी का गठन औपचारिक रूप से पूरा हो गया।

कुल्लू से निकला बड़ा राजनीतिक संदेश

कुल्लू ब्लॉक समिति के इस चुनाव ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय निकायों की राजनीति में केवल संख्या बल ही सब कुछ नहीं होता। कई बार एक वोट या फिर किस्मत का फैसला पूरे राजनीतिक समीकरण बदल देता है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा अपनी समीक्षा में क्या निष्कर्ष निकालती है और इस घटनाक्रम का स्थानीय राजनीति पर आगे क्या असर पड़ता है।

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