#राजनीति
June 20, 2026
HC की आउटसोर्स भर्ती रोक पर CM सुक्खू बोले- इससे किसी का भला नहीं, सरकार को लेने दें फैसले
प्रदेश के हितों की रक्षा करना सरकार की पहली जिम्मेदारी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में आउटसोर्स भर्तियों पर लगी न्यायिक रोक को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि नीतिगत फैसले लेने का अधिकार सरकार के पास होना चाहिए और बार-बार रोक लगाने से न प्रदेश का विकास होता है, न युवाओं को रोजगार मिलता है और न ही आम जनता को लाभ पहुंचता है।
दरअसल, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि किसी नीति में सुधार की जरूरत हो तो उस पर चर्चा हो सकती है, लेकिन विकास कार्य बाधित नहीं होने चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और रोजगार से जुड़े निर्णय सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और यदि किसी नीति में सुधार की आवश्यकता हो तो उस पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन बार-बार रोक लगने से न सरकार का भला होता है और न ही प्रदेश के लोगों का।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि आउटसोर्स नियुक्तियों को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और विभिन्न विभागों में आवश्यक मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि अदालतों का सम्मान करते हुए सरकार अपने पक्ष को मजबूती से रखेगी और कानूनी प्रक्रिया का पालन करेगी।
सीएम सुक्खू ने यह भी कहा कि उनकी सरकार हिमाचल के प्राकृतिक संसाधनों, जल संपदा और भूमि से जुड़े मामलों में किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसी सोच के साथ कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पूर्व सरकारों पर भी अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए कहा कि अतीत में कई परियोजनाओं में प्रदेश के संसाधनों का उचित मूल्य नहीं लिया गया।
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वर्तमान सरकार उन सभी मामलों की समीक्षा कर रही है जहां हिमाचल के हितों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली थी। उन्होंने जलविद्युत परियोजनाओं में रॉयल्टी बढ़ाने और परियोजनाओं की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें राज्य के नियंत्रण में सौंपने की मांग भी केंद्र सरकार के समक्ष उठाने की बात कही।
राजनीतिक और कानूनी चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश में आउटसोर्स नियुक्तियों, भर्ती प्रक्रियाओं और सरकारी नीतियों को लेकर बहस तेज है। सरकार का दावा है कि उसके फैसलों का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना और युवाओं को अवसर प्रदान करना है, जबकि विपक्ष और कुछ पक्ष इन निर्णयों पर सवाल उठा रहे हैं।