शिमला। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव परिणाम आने के बाद अब जिला परिषदों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। BJP अब जिला परिषदों में सत्ता का पूरा नियंत्रण स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रही है।
जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर BJP की नजर
पार्टी का मुख्य फोकस अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर कब्जा सुनिश्चित करने पर है। जिसके लिए संगठन ने प्रदेश से लेकर बूथ स्तर तक अपना पूरा तंत्र सक्रिय कर दिया है।
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किंगमेकर बने निर्दलीय
प्रदेश के बिलासपुर, मंडी, कुल्लू, ऊना, सोलन, हमीरपुर, किन्नौर और सिरमौर जिलों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को स्पष्ट बहुमत मिला है। ऐसे में इन जिलों में भाजपा का बोर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं शिमला और कांगड़ा जैसे बड़े जिलों में निर्दलीय सदस्यों की भूमिका निर्णायक बन गई है, जिसके चलते यहां राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं।
विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को सौंपी जिम्मेदारी
भाजपा नेतृत्व ने जिला परिषद सदस्यों को एकजुट रखने और राजनीतिक समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्रों के विधायकों, पूर्व विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को सौंपी है। पार्टी के जिला प्रभारी और सह-प्रभारी लगातार जिलों का दौरा कर निर्वाचित सदस्यों और स्थानीय नेतृत्व के साथ बैठकें कर रहे हैं।
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उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा
बैठकों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा हो रही है। आरक्षण रोस्टर को ध्यान में रखते हुए दावेदारों की सूची तैयार की जा रही है। जिलों से प्राप्त फीडबैक और नेताओं की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम नाम तय किए जाएंगे।
निर्दलीयों और बागियों को साधने की कोशिश
भाजपा की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा उन 28 निर्दलीय और बागी विजयी उम्मीदवारों को भी साथ जोड़ना है, जिन्हें पार्टी विचारधारा के करीब माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इन सदस्यों का समर्थन मिलने से जिला परिषदों में स्थिर और मजबूत बोर्ड गठन आसान होगा।
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प्रदेश नेतृत्व कर रहा सीधी निगरानी
सूत्रों के अनुसार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और संगठन महामंत्री सिद्धार्थन स्वयं पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। हाल ही में हुई वर्चुअल बैठक में भी जिला परिषद बोर्ड गठन और संभावित राजनीतिक समीकरणों पर विस्तृत चर्चा की गई।
कब होगी नामों की घोषणा?
पार्टी नेताओं का कहना है कि जिला परिषद सदस्यों की शपथ ग्रहण प्रक्रिया पूरी होते ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए संभावित नामों की घोषणा की जा सकती है। भाजपा किसी भी तरह की गुटबाजी या अंतिम समय की राजनीतिक उठापटक से बचने के लिए पहले से ही सभी विकल्पों पर काम कर रही है।
