शिमला। पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब हिमाचल प्रदेश की सड़कों पर भी दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने जहां पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को महंगा कर दिया है, वहीं इसका सीधा असर अब मंत्री विक्रमादित्य सिंह के लोक निर्माण विभाग के तहत चल रहे सड़क निर्माण कार्यों पर भी पड़ने लगा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि प्रदेश में सड़क निर्माण की लागत 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है और ठेकेदारों ने काम बंद करने की चेतावनी दे दी है।
तेल संकट का असर अब सड़कों तक पहुंचा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी के चलते बिटुमेन (डामर) और एलडीओ (लाइट डीजल ऑयल) के दामों में भारी उछाल आया है। ये दोनों सामग्री सड़क निर्माण के लिए बेहद जरूरी होती हैं। बिटुमेन जहां सड़कों की टायरिंग में इस्तेमाल होता है, वहीं एलडीओ मशीनों और मेटलिंग कार्य में अहम भूमिका निभाता है।
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PMGSY और नाबार्ड परियोजनाएं प्रभावित
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और नाबार्ड के तहत चल रही सैकड़ों परियोजनाएं इस संकट से प्रभावित हो रही हैं। जहां एक ओर चल रहे काम रुकने की कगार पर हैं, वहीं नई परियोजनाओं के शुरू होने पर भी संशय बना हुआ है।
दोगुनी हुई कीमतें, बढ़ी ठेकेदारों की मुश्किलें
जब परियोजनाओं की डीपीआर तैयार की गई थी, तब बिटुमेन की कीमत करीब 43 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 86 रुपये प्रति किलो से अधिक हो गई है। इसी तरह एलडीओ की कीमतों में भी 50 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है। अचानक आई इस महंगाई ने ठेकेदारों के बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। बढ़ती कीमतों का सीधा असर सड़क निर्माण लागत पर पड़ा है। अनुमान के मुताबिक, अब प्रति किलोमीटर सड़क बनाने की लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई है।
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- 3 मीटर चौड़ी सड़क की लागत 13.75 लाख से बढ़कर करीब 17-18 लाख रुपये प्रति किलोमीटर हो गई है।
- 6 मीटर सड़क की लागत 27.50 लाख से बढ़कर 35 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
- 10 मीटर सड़क की लागत 41 लाख से बढ़कर 53 लाख रुपये प्रति किलोमीटर तक जा पहुंची है।
काम रोकने की कगार पर ठेकेदार
बढ़ती लागत के चलते ठेकेदारों ने साफ कर दिया है कि वर्तमान दरों पर काम करना संभव नहीं है। कई ठेकेदारों ने विभाग को लिखित में सूचित कर दिया है कि यदि सरकार ने अतिरिक्त लागत की भरपाई नहीं की, तो वे काम बंद करने को मजबूर होंगे। कुछ स्थानों पर सड़क निर्माण कार्य पहले ही धीमा पड़ गया है।
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मंत्री ने केंद्र के समक्ष मामला उठाने की बात कही
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि ईरान-इजरायल युद्ध के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे एलडीओ और बिटुमेन की कीमतों में उछाल आया है। उन्होंने बताया कि विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाए और बढ़ी हुई लागत के लिए अतिरिक्त फंड की मांग की जाए।
आयात पर निर्भरता बनी बड़ी वजह
भारत बिटुमेन और संबंधित उत्पादों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, जो इराक, ईरान, यूएई, सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों से आते हैं। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे कीमतों में अचानक उछाल आया है।
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ग्रामीण विकास पर पड़ सकता है असर
अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी पर पड़ेगा। सड़क निर्माण की गति धीमी होने से विकास कार्य भी प्रभावित होंगे और दूरदराज के इलाकों में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
