सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला की पहाड़ियों में बहने वाली गिरी नदी अब एक नए युग की शुरुआत करने जा रही है। दशकों तक योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित रही रेणुका जी बांध परियोजना अब जमीन पर उतरने को तैयार है। सालों का लंबा इंतजार अब समाप्ति की ओर है और आने वाले समय में यही गिरी नदी देश की राजधानी दिल्ली की प्यास बुझाने में अहम भूमिका निभाएगी।
परियोजना के तहत गिरी नदी के प्रवाह को टनलों के माध्यम से अस्थायी रूप से मोड़ा जाएगा, जिसके बाद यहां विशाल बांध का निर्माण किया जाएगा। यह बदलाव केवल इंजीनियरिंग का कार्य नहीं, बल्कि एक पूरी नदी की दिशा को नियंत्रित करने जैसा ऐतिहासिक कदम होगा। इस नदी पर बनने वाले बांध से जहां हिमाचल को बिजली मिलेगी, वहीं दिल्ली को इससे पीने का पानी मिलने वाला है।
अप्रैल से शुरू होगा अहम चरण
परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण चरण अप्रैल माह से शुरू होने जा रहा है। गिरी नदी के बहाव को मोड़ने के लिए करीब 910 करोड़ रुपये की लागत से तीन डायवर्जन टनल बनाई जाएंगी। प्रत्येक टनल लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी होगी। इन सुरंगों के माध्यम से नदी के पानी को अस्थायी रूप से डायवर्ट किया जाएगा, ताकि मुख्य बांध का निर्माण सुरक्षित तरीके से किया जा सके। टनल निर्माण का जिम्मा देश की प्रमुख निर्माण कंपनी को सौंपा गया है और इसे करीब 30 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जैसे ही ये टनल तैयार होंगी, बांध निर्माण कार्य को गति मिल जाएगी।
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पहली बार बदलेगा गिरी नदी का प्रवाह
परियोजना के तहत पनार क्षेत्र में टनल का इनलेट और ददाहू क्षेत्र में आउटलेट बनाया जाएगा। इन सुरंगों के जरिए पहली बार गिरी नदी के प्राकृतिक बहाव को बदला जाएगा। हालांकि, निर्माण कार्य पूरा होने के बाद नदी को उसके मूल मार्ग पर पुनः बहाल कर दिया जाएगा।
दिल्ली को मिलेगा स्थायी जल स्रोत
रेणुका जी बांध परियोजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली को दीर्घकालिक जल आपूर्ति सुनिश्चित करना है। परियोजना के तहत करीब 24 किलोमीटर लंबी झील का निर्माण होगा, जिससे हरियाणा के रास्ते विशेष तंत्र के जरिए पानी दिल्ली तक पहुंचाया जाएगा। अनुमान है कि दिल्ली को प्रतिदिन लगभग 23 क्यूसिक पानी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे राजधानी की जल समस्या को बड़ी राहत मिलेगी।
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हिमाचल को भी होगा बड़ा फायदा
यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। बांध से करीब 40 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा, जिससे प्रदेश की ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और बुनियादी ढांचे को भी मजबूती मिलेगी। गिरी नदी अब प्रदेश की आर्थिकी को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रभाव और चुनौतियां भी मौजूद
परियोजना के तहत लगभग 1,508 हेक्टेयर क्षेत्र जलमग्न होगा। इससे 20 पंचायतों के 41 गांव प्रभावित होंगे और करीब 7,000 लोगों पर इसका असर पड़ेगा। लगभग 346 परिवारों को विस्थापन का सामना करना पड़ेगा, जिसके पुनर्वास की चुनौती भी सरकार के सामने होगी।
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1976 से 2026 तक का सफर
इस परियोजना की परिकल्पना वर्ष 1976 में की गई थी, लेकिन राज्यों के बीच सहमति के अभाव में यह लंबे समय तक अटकी रही। वर्ष 1994 में प्रारंभिक समझौता हुआ, फिर भी मामला आगे नहीं बढ़ सका। अंततः वर्ष 2021 में इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिला और अब यह अपने क्रियान्वयन के निर्णायक चरण में पहुंच गई है।
नई दिशा में बहेगी विकास की धारा
गिरी नदी, जो अब तक शांत पहाड़ी धारा के रूप में जानी जाती थी, अब विकास की नई पहचान बनने जा रही है। यह परियोजना न केवल दिल्ली की प्यास बुझाएगी, बल्कि हिमाचल की आर्थिक और ऊर्जा क्षमता को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी। आने वाला अप्रैल महीना इस ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत का साक्षी बनेगा, जब गिरी नदी की धारा बदलेगी और साथ ही बदलने लगेगी उत्तर भारत के जल प्रबंधन की तस्वीर।
