हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक प्रेरणादायक घटना सामने आई है। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि जिम्मेदारी निभाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि सोच बड़ी होनी चाहिए। टौणीदेवी क्षेत्र में दो नन्ही बच्चियों ने जो किया- वो ना सिर्फ सराहनीय है बल्कि समाज के लिए एक बड़ा संदेश भी है।
हाईवे पर गिरी थी बजरी
दरअसल, कल सुबह करीब 9 बजे NH-03 पर टौणीदेवी पुलिस चौकी के पास एक ओवरलोड टिप्पर क्रशर से बजरी लेकर कस्बे की ओर जा रहा था। वाहन में क्षमता से अधिक बजरी भरी होने के कारण रास्ते भर कंकड़-पत्थर सड़क पर गिरते जा रहे थे।
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ओवरलोड टिप्पर ने बिखेरी
धीरे-धीरे सड़क पर बजरी की एक परत जमने लगी, जो खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती थी। इसी दौरान पास ही एक घर की छत पर खेल रहीं दो मासूम बच्चियां नभी और संचिता चौहान की नजर सड़क पर पड़ी इस बजरी पर गई।
बच्चियों की पड़ी नजर
छोटी उम्र के बावजूद उन्होंने तुरंत स्थिति की गंभीरता को समझ लिया। उन्हें एहसास हुआ कि अगर समय रहते इसे साफ नहीं किया गया, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। बिना किसी को बताए, दोनों बच्चियां तुरंत घर के अंदर गईं और झाड़ू उठाकर सड़क पर पहुंच गईं।
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45 मिनट तक सड़क पर लगाया झाड़ू
इसके बाद उन्होंने बिना थके करीब 45 मिनट तक सड़क पर बिखरी बजरी को साफ किया। तेज धूप और वाहनों की आवाजाही के बीच भी उनका हौसला कम नहीं हुआ। नन्हें हाथों से सड़क बुहारती इन बच्चियों को देखकर वहां से गुजरने वाले लोग हैरान रह गए।
बच्चियों ने टाला हादसा
कई वाहन चालकों ने अपने वाहन रोककर बच्चियों की इस पहल को सराहा। कुछ लोगों ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि जहां बड़े लोग अक्सर ऐसी स्थितियों को नजरअंदाज कर देते हैं। वहीं इन बच्चियों ने अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए एक संभावित हादसे को टालने का काम किया।
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छोटा सा कदम ला सकता है बड़ा बदलाव
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है क्या हम अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में कहीं पीछे तो नहीं रह गए? नभी और संचिता की यह पहल बताती है कि अगर सोच साफ हो और इरादे मजबूत हों, तो छोटा सा कदम भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।
