सोलन। हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। सालों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही एक सड़क की सूरत बदलने के लिए जनता सालों तक गुहार लगाती रही, लेकिन विभाग सोया रहा। मगर जैसे ही लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इस सड़क का औचक निरीक्षण करने का फैसला लिया, तो पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। खुद को बचाने के लिए अफसरों ने न सिर्फ विभागीय ईमानदारी की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि सीधे मंत्री की आंखों में ही धूल झोंकने का दुस्साहस कर डाला। विभाग की इस खोखली कार्यप्रणाली को देखकर अब स्थानीय जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
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सोशल मीडिया पर ऐलान, फिर अचानक जागा विभाग
दरअसल कुछ दिन पहले मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने अपने सोशल मीडिया मंच के माध्यम से घोषणा की थी कि वह जल्द ही सोलन-सुबाथु सड़क का जमीनी स्तर पर निरीक्षण करेंगे। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया था कि सड़क की बदहाल स्थिति को हर हाल में सुधारा जाएगा और लोगों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। मंत्री के इस बयान के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद जगी थी कि वर्षों से समस्याओं का सामना कर रही इस महत्वपूर्ण सड़क का अब स्थायी समाधान निकलेगा। लेकिन मंत्री के दौरे की तारीख नजदीक आते ही जो दृश्य सामने आएए उन्होंने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया।
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विभाग ने कर दी लीपापोती
स्थानीय लोगों के अनुसार कई महीनों तक सड़क की ओर ध्यान न देने वाला विभाग अचानक सक्रिय हो गया। पिछले कुछ दिनों में मार्ग पर मशीनें और कर्मचारी दिखाई देने लगे। हालांकि लोगों का आरोप है कि सड़क की वास्तविक मरम्मत करने के बजाय केवल गड्ढों में मिट्टी और पत्थर डालकर उन्हें अस्थायी रूप से भरने का प्रयास किया गया।
इतना ही नहीं लंबे समय से बंद पड़ी नालियों की सफाई भी अचानक शुरू कर दी गई। इससे यह धारणा और मजबूत हुई कि विभाग मंत्री के निरीक्षण से पहले सड़क को केवल ऊपर-ऊपर से ठीक दिखाने की कोशिश कर रहा है।
22 किलोमीटर की जीवनरेखा बनी परेशानी का कारण
सोलन-सुबाथु मार्ग क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण सड़क मानी जाती है। करीब 22 किलोमीटर लंबा यह मार्ग न केवल हजारों लोगों की आवाजाही का प्रमुख साधन है, बल्कि चार विधानसभा क्षेत्रों और दो जिलों को भी जोड़ता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में निजी वाहन, सार्वजनिक परिवहन और स्थानीय लोग इसी सड़क का उपयोग करते हैं। इसके बावजूद सड़क की हालत लंबे समय से बेहद खराब बनी हुई है। जगह-जगह बड़े गड्ढे, टूटी सड़क और जल निकासी की खराब व्यवस्था के कारण वाहन चालकों और स्थानीय निवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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वादों और बहानों के बीच उलझा सड़क सुधार कार्य
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत को लेकर लंबे समय से केवल आश्वासन ही दिए जाते रहे। कभी मौसम को कारण बताया गया, कभी तारकोल की उपलब्धता का मुद्दा सामने आया। कई बार डीजल और निर्माण सामग्री की कमी का हवाला देकर काम टाल दिया गया। फरवरी में सड़क की खराब स्थिति को लेकर प्रदर्शन भी हुए थे। इसके बाद मई में अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर सुधार कार्य शुरू करने का दावा किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला।
पहली बारिश में बह जाएगा सारा काम?
ग्रामीणों और वाहन चालकों का कहना है कि जिन गड्ढों को तकनीकी मानकों के अनुसार पक्का किया जाना चाहिए था, उनमें केवल मिट्टी और पत्थर डाल दिए गए हैं। उनका मानना है कि पहली तेज बारिश के बाद यह सामग्री बह जाएगी और सड़क पहले जैसी या उससे भी अधिक खराब स्थिति में पहुंच सकती है। लोगों का सवाल है कि यदि विभाग मंत्री के दौरे से पहले मशीनें, कर्मचारी और संसाधन जुटा सकता था, तो यही कार्य पिछले कई महीनों से क्यों नहीं किया गया? और यदि अब भी केवल अस्थायी मरम्मत की जा रही है, तो स्थायी समाधान कब मिलेगा?
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मंत्री को दिखाई जाएगी हकीकत या सजाया गया रास्ता?
क्षेत्र में अब सबसे बड़ी चर्चा यही है कि मंत्री विक्रमादित्य सिंह जब निरीक्षण के लिए पहुंचेंगे तो उन्हें सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई जाएगी या फिर विभाग द्वारा तैयार किया गया ‘सजाया-संवारा’ दृश्य। लोगों का कहना है कि सड़क की बदहाली ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है और अब उन्हें केवल अस्थायी मरम्मत नहीं, बल्कि पूरी सड़क की वैज्ञानिक और स्थायी पुनर्निर्माण की आवश्यकता है।
स्थायी समाधान की मांग तेज
स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों, व्यापारियों और ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि सड़क की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच करवाई जाए और सोलन-सुबाथु मार्ग का स्थायी रूप से पुनर्निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र की जीवनरेखा है और इसकी अनदेखी हजारों लोगों की सुरक्षा और सुविधा के साथ समझौता है।
फिलहाल मंत्री के दौरे और निरीक्षण पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि निरीक्षण के बाद सड़क की तस्वीर वास्तव में बदलती है या फिर यह मामला भी केवल आश्वासनों तक सीमित रह जाता है।
