सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के नाहन स्थित राजकीय आदर्श शमशेर वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल नाहन में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। करीब 243 साल पुराना यह प्रतिष्ठित संस्थान अब नए दौर में कदम रखते हुए पूरी तरह सह-शिक्षा (को-एजुकेशन) स्कूल बन गया है, जहां अब बेटियों के लिए भी शिक्षा के द्वार खोल दिए गए हैं। यह फैसला न केवल स्कूल के इतिहास में नया अध्याय जोड़ता है, बल्कि समाज में समानता और बदलती सोच का भी मजबूत संदेश देता है।
243 साल पुराने स्कूल में बड़ा बदलाव
बता दें कि 1 अप्रैल 2026 से इस नए सिस्टम की शुरुआत हो चुकी है और स्कूल के नाम से “ब्वॉयज” शब्द भी हटा दिया गया है। इस बदलाव की सबसे खास बात यह रही कि छठी कक्षा में पहली बार एक छात्रा अर्चना का एडमिशन हुआ। स्कूल स्टाफ और बच्चों ने उसका बड़े उत्साह के साथ स्वागत किया। यह सिर्फ एक एडमिशन नहीं, बल्कि बदलती सोच और बेटियों को बराबरी का हक देने की एक मजबूत शुरुआत मानी जा रही है।
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लड़कियों को मिलेंगी अब बेहतर सुविधाएं
राजकीय आदर्श शमशेर वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल नाहन में अभी 10 अप्रैल तक एडमिशन चल रहे हैं और स्कूल पहले की तरह हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से ही जुड़ा रहेगा। स्कूल वालों का कहना है कि अब लड़कियों के लिए भी पढ़ाई और बाकी एक्टिविटीज़ की अच्छी सुविधाएं दी जाएंगी, ताकि वे भी हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकें और किसी भी चीज में पीछे न रहें।
साइंस और कॉमर्स लड़कियों को मिलती थी एडमिशन
अगर पहले की बात करें, तो 90 के दशक में 11वीं-12वीं की साइंस और कॉमर्स क्लास में लड़कियों को भी एडमिशन मिलता था, क्योंकि उस समय कन्या स्कूल में ये सुविधाएं नहीं थीं। लेकिन बाद में जब कन्या स्कूल में ये सब शुरू हो गया, तो यहां लड़कियों का एडमिशन बंद कर दिया गया। अब काफी सालों बाद फिर से ये नियम बदला गया है और पहली बार छोटे क्लास से ही लड़कियों के लिए पूरी तरह दरवाजे खोल दिए गए हैं।
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गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है स्कूल
इतिहास के नजरिए से देखें तो इस स्कूल की शुरुआत 30 अप्रैल 1783 को महाराजा धर्म प्रकाश ने एक प्राथमिक विद्यालय के रूप में की थी। बाद में यह धीरे-धीरे मिडिल, हाई और फिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल बनता गया। आज यह स्कूल न सिर्फ शिक्षा का केंद्र है, बल्कि अपने गौरवशाली इतिहास के लिए भी जाना जाता है।
देश-प्रदेश को दिए कई बड़े नाम
राजकीय आदर्श शमशेर वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल नाहन सिर्फ पढ़ाई कराने वाला स्कूल नहीं रहा, बल्कि यहां से ऐसे बच्चे निकले हैं जिन्होंने आगे चलकर बड़ा नाम कमाया और देश-प्रदेश का नाम रोशन किया। इसी स्कूल से पढ़े डॉ. वाईएस परमार हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री बने। वहीं अश्विनी कुमार जैसे लोग भी यहीं से पढ़कर बड़े पदों तक पहुंचे। इसके अलावा इस स्कूल ने 7 स्वतंत्रता सेनानी, 13 IAS, 5 IPS, 2 मंत्री, 1 विधायक, 3 सांसद और 3 लेफ्टिनेंट भी दिए हैं।
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इतिहास की पहचान आज भी जिंदा
नाहन स्कूल का इतिहास आज भी साफ दिखाई देता है। स्कूल के गेट पर लगा पुराना बड़ा घंटा, जो अठारहवीं सदी का है, आज भी इसकी पुरानी शान और पहचान को दिखाता है। ये घंटा सिर्फ एक चीज नहीं है, बल्कि स्कूल के लंबे इतिहास की याद दिलाता है। इसी वजह से इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले लोग और शोध करने वाले भी इसे देखने आते हैं।
250 साल पुराना घंटा ऐतिहासिक पहचान
करीब 250 साल पुराना ये स्कूल अब समय के साथ बदल रहा है और नई सोच के साथ आगे बढ़ रहा है, जहां अब सबको बराबर मौका और बेहतर शिक्षा देने पर जोर दिया जा रहा है स्कूल के मुख्य द्वार पर लगा पुराना विशाल घंटा आज भी इसकी ऐतिहासिक पहचान को दर्शाता है, जो लोगों को इसके लंबे और गौरवशाली सफर की याद दिलाता है।
