शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों से पहले ही कई गांवों ने लोकतंत्र की एक अलग तस्वीर पेश की है। प्रदेश की 128 ग्राम पंचायतों में बिना मतदान के ही प्रतिनिधियों का चयन हो गया है। इन पंचायतों को अब सरकार की ओर से 25-25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। शुक्रवार को नाम वापसी के अंतिम दिन तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई और कई पंचायतों में आपसी सहमति से प्रधान, उपप्रधान और पंचों का चयन कर लिया गया।

शिमला सबसे आगे, 42 पंचायतें निर्विरोध

अब तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार जिला शिमला सबसे आगे रहा है, जहां 42 पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं। इसके अलावा सिरमौर में 28, किन्नौर में 18 और सोलन जिले में 12 पंचायतों में बिना चुनाव के प्रतिनिधि चुने गए। बिलासपुर में केवल एक पंचायत निर्विरोध रही, जबकि निचले हिमाचल की 27 पंचायतों में भी सर्वसम्मति बनी है।

शिमला जिले में इस बार करीब 9.52 प्रतिशत पंचायतों में चुनाव की जरूरत ही नहीं पड़ी।

 

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जिला पंचायत अधिकारी डॉ. विनय कुमार के अनुसार चौपाल विकास खंड में सबसे अधिक 10 पंचायतें निर्विरोध चुनी गईं। ठियोग और छोहारा ब्लॉक में भी सात-सात पंचायतों में सहमति बनी। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे सामाजिक एकता और आपसी तालमेल की मिसाल माना जा रहा है।

लाहौल-स्पीति में भी बनी सहमति

जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में भी 17 पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं। इनमें लाहौल की 8 और स्पीति की 9 पंचायतें शामिल हैं। इसके अलावा कुल्लू, चंबा, मंडी, कांगड़ा और ऊना की कई पंचायतों में भी सहमति से प्रतिनिधि चुने गए। ऊना जिले की पांच पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान और पंचों का सर्वसम्मति से चयन हुआ।

 

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चुनाव प्रचार में महिलाएं सबसे आगे

इस बार पंचायत चुनावों में महिलाओं की भागीदारी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण होने के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं खुद चुनाव मैदान में उतरी हैं। वहीं कई जगह महिलाओं ने अपने पति और बेटों के समर्थन में प्रचार की कमान संभाल ली है। गांवों में महिला टोलियां घर-घर जाकर वोट मांग रही हैं। सोशल मीडिया, पोस्टर, बैनर और नारों के जरिए प्रचार तेज हो गया है। भीषण गर्मी के बावजूद गांवों में चुनावी माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है।

सिरमौर में नामांकन वापसी के दौरान बखेड़ा

इसी बीच सिरमौर जिले के रेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र की खालाक्यार पंचायत में नामांकन वापसी के दौरान बड़ा विवाद भी सामने आया। उपप्रधान पद का एक उम्मीदवार कथित तौर पर एआरओ से नाम वापसी का प्रपत्र छीनकर फरार हो गया। घटना के बाद प्रशासन ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। बीडीओ ददाहू दर्शन लाल पुंडीर ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और विभागीय कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।


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लोकतंत्र में सहमति की नई तस्वीर

प्रदेश में बड़ी संख्या में पंचायतों का निर्विरोध चुना जाना इस बार पंचायत चुनावों की सबसे बड़ी चर्चा बन गया है। जहां एक ओर इसे गांवों की एकजुटता और सामाजिक सौहार्द की मिसाल बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ जगहों पर चुनावी विवाद भी सामने आने लगे हैं। आने वाले दिनों में मतदान वाले क्षेत्रों में चुनावी मुकाबला और तेज होने की संभावना है।

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