#विविध
August 12, 2026
हिमाचल : 77 वर्षीय डॉक्टर ने सरकार को सौंपी 80 करोड़ की संपत्ति, देह दान करने का भी फैसला
डॉक्टर चाहतें हैं कि संस्थान का नाम उनकी पत्नी के नाम पर रखा जाए
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के जोलसप्पड़ निवासी 77 वर्षीय चिकित्सक डॉ. राजेंद्र कंवर ने समाजसेवा की ऐसी मिसाल पेश की है- जिसकी हर ओर चर्चा हो रही है। डॉ. कंवर ने अपनी और दिवंगत पत्नी कृष्णा कंवर की करीब 80 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति प्रदेश सरकार को समर्पित कर दी है।
पांच अगस्त को उन्होंने अपनी संपत्ति की गिफ्ट डीड सरकार के नाम कर दी- जिसके बाद संबंधित भूमि का इंतकाल भी डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर के नाम दर्ज हो गया है। डॉ. कंवर की इच्छा है कि उनकी संपत्ति का इस्तेमाल जरूरतमंद लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किया जाए।
डॉ. राजेंद्र कंवर ने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी कृष्णा कंवर ने वर्ष 2021 में ही अपनी पूरी स्वयं अर्जित चल-अचल संपत्ति प्रदेश सरकार के नाम करने का निर्णय लिया था। अब पांच अगस्त को उन्होंने गिफ्ट डीड के माध्यम से इसे औपचारिक रूप से सरकार को सौंप दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी स्वयं अर्जित संपत्ति है, जबकि पुश्तैनी संपत्ति वह अपने करीबी रिश्तेदारों को देंगे। जोलसप्पड़ में डॉ. कंवर का दो मंजिला मकान, पांच कनाल पांच मरला भूमि, आभूषण, कार, फर्नीचर, बैंक जमा राशि और अन्य संपत्तियां शामिल हैं।
मौजूदा बाजार मूल्य के अनुसार ,इन सभी की कीमत 80 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। खास बात यह है कि उनकी यह संपत्ति निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज से महज करीब 100 मीटर की दूरी पर स्थित है।
डॉ. कंवर चाहते हैं कि उनकी संपत्ति का उपयोग समाज के जरूरतमंद लोगों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किया जाए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि यहां जेरियाट्रिक केयर सेंटर या वृद्धाश्रम बनाया जाए।
उनकी इच्छा है कि इस संस्थान का नाम उनकी और उनकी दिवंगत पत्नी के नाम पर ‘कृष्णा राजेंद्र’ रखा जाए। उनकी पत्नी कृष्णा कंवर शिक्षा विभाग में करीब 32 वर्ष तक सेवाएं देने के बाद वर्ष 2011 में प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हुई थीं। छह दिसंबर 2020 को उनका निधन हो गया था।
डॉ. राजेंद्र कंवर की समाजसेवा केवल संपत्ति दान करने तक सीमित नहीं है। 77 वर्ष की उम्र में भी वह अपने घर पर मरीजों का महज चंद रुपये में इलाज कर रहे हैं। उनका कहना है कि जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाना उनके लिए हमेशा प्राथमिकता रहा है।
उन्होंने मृत्यु के बाद अपनी देह भी मेडिकल छात्रों के अध्ययन के लिए दान करने का फैसला लिया है। इसके लिए उन्होंने मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में लिखित सहमति दी है। विभाग की ओर से उन्हें इसके लिए पहचान पत्र भी जारी किया गया है।
डॉ. राजेंद्र कंवर ने तीन जनवरी 1977 को स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल ऑफिसर के रूप में अपनी सेवा शुरू की थी। वर्ष 2010 में वह वरिष्ठ चिकित्सक के पद से सेवानिवृत्त हुए। करीब 33 वर्षों तक सरकारी स्वास्थ्य सेवा में रहने के बाद भी उन्होंने लोगों की सेवा का सिलसिला जारी रखा। वहीं उनकी पत्नी कृष्णा कंवर ने शिक्षा विभाग में लंबी सेवा दी। दोनों ने अपनी मेहनत से अर्जित संपत्ति को अपने बाद समाज के काम आने का फैसला किया।
डॉ. कंवर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मुलाकात कर अपनी संपत्ति के इस्तेमाल को लेकर इच्छा जाहिर करने की बात कही है। उन्होंने नादौन के एसडीएम को भी इस संबंध में जानकारी दी है।
SDM निशांत शर्मा ने डॉ. कंवर के इस निर्णय की सराहना की है। 80 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति समाज और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए समर्पित करने का यह फैसला न सिर्फ उनकी सोच को दर्शाता है- बल्कि उन लोगों के लिए भी मिसाल है जो अपनी संपत्ति को समाज के जरूरतमंद वर्ग के काम लाने की सोच रखते हैं।