#विविध
August 12, 2026
सुक्खू सरकार को बिजली शुल्क बढ़ाना पड़ा भारी- हाईकोर्ट ने पैसा लौटाने के दिए आदेश
करोड़ों की अतिरिक्त वसूली का होगा हिसाब
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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टोन क्रशर उद्योग को बड़ी राहत देते हुए बिजली शुल्क में की गई भारी बढ़ोतरी को वैधानिक प्रावधानों के विपरीत करार दिया है। अदालत ने राज्य सरकार और हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड को निर्देश दिया है कि जिन याचिकाकर्ताओं से बढ़ा हुआ बिजली शुल्क वसूला गया है, उनकी अतिरिक्त राशि वापस की जाए या फिर आगामी बिजली बिलों में उसका समायोजन किया जाए।
दरअसल, मामला स्टोन क्रशर उद्योग पर बिजली शुल्क बढ़ाने से जुड़ा था। इस संबंध में 140 से अधिक याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना था कि सरकार ने निर्धारित सीमा से कहीं अधिक बिजली शुल्क बढ़ा दिया, जिससे उद्योग पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सितंबर 2023 और 18 जनवरी 2024 को जारी संबंधित अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया।
अदालत ने कहा कि वर्ष 2009 के हिमाचल प्रदेश बिजली शुल्क अधिनियम के तहत सरकार को मूल दर में निर्धारित सीमा से अधिक बढ़ोतरी करने का अधिकार नहीं है। अदालत के समक्ष रखे गए तथ्यों के अनुसार, वर्ष 2017 में बिजली शुल्क 11 प्रतिशत निर्धारित था। कानून की व्याख्या के आधार पर सरकार अधिकतम 16.5 प्रतिशत तक ही इसकी वृद्धि कर सकती थी। इसके बावजूद शुल्क को पहले 25 प्रतिशत और बाद में 37.50 प्रतिशत तक बढ़ाया गया।
हाईकोर्ट ने माना कि इस तरह की बढ़ोतरी वैधानिक सीमा से बाहर थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल पर्यावरणीय प्रभाव या बिजली की अधिक खपत के आधार पर स्टोन क्रशर्स के लिए अलग उप-वर्ग तैयार कर शुल्क निर्धारित नहीं किया जा सकता। अदालत ने सरकार की उस दलील को स्वीकार नहीं किया जिसमें स्टोन क्रशर्स को अन्य औद्योगिक इकाइयों से अलग मानकर अधिक शुल्क लगाने का आधार बताया गया था।
खंडपीठ ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं के वर्गीकरण और उनसे संबंधित नियमन के मामले में वैधानिक अधिकारों की अपनी सीमाएं हैं। फैसले में यह भी कहा गया कि सरकार मौजूदा कानूनी वर्गीकरण को अपनी ओर से बदलकर किसी विशेष उद्योग के लिए अलग श्रेणी नहीं बना सकती। बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े वर्गीकरण और नियमन की व्यवस्था संबंधित वैधानिक आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब बिजली बोर्ड को उन याचिकाकर्ताओं से वसूले गए अतिरिक्त शुल्क का पूरा हिसाब करना होगा। अदालत ने कहा है कि कानून के अनुरूप अधिकतम दर के आधार पर शुल्क की गणना की जाए और अतिरिक्त वसूली की राशि वापस की जाए अथवा भविष्य के बिलों में समायोजित की जाए।
इस फैसले को स्टोन क्रशर और खनन कारोबार से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। कारोबारियों का लंबे समय से तर्क था कि बढ़े हुए बिजली शुल्क के कारण संचालन की लागत काफी बढ़ गई थी और कई इकाइयों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा था। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद संबंधित याचिकाकर्ताओं को अतिरिक्त भुगतान की वापसी या बिलों में समायोजन का रास्ता मिलेगा। साथ ही सरकार और बिजली बोर्ड को भविष्य में बिजली शुल्क निर्धारित करते समय संबंधित कानूनी सीमाओं का पालन करना होगा।