शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इंतजार अब खत्म होने वाला है। राज्य चुनाव आयोग की ओर से आज या कल चुनाव तारीखों का औपचारिक ऐलान किया जा सकता है।

हिमाचल में पंचायत चुनाव का काउंटडाउन 

तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं और मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन भी हो चुका है। इस बार प्रदेश की 3758 पंचायतों में करीब 51 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।

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आज-कल में लगेगी आचार संहिता

चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही पूरे प्रदेश में आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसके बाद सरकार और प्रशासन किसी भी नई योजना या घोषणा पर रोक के नियमों का पालन करेंगे। आयोग पहले ही सभी जिलों के उपायुक्तों को चुनावी तैयारियां दुरुस्त रखने के निर्देश दे चुका है, ताकि प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।

तीन चरणों में होगा चुनाव

संभावना जताई जा रही है कि पंचायत चुनाव तीन चरणों में आयोजित किए जाएंगे। दुर्गम और दूरदराज इलाकों को ध्यान में रखते हुए 22, 24 और 26 मई को मतदान कराया जा सकता है। इन चुनावों में 50 हजार से अधिक कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात रहेंगे।

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बैलेट पेपर से होंगे पंचायत चुनाव

खास बात यह है कि पंचायत चुनाव पारंपरिक बैलेट पेपर के माध्यम से ही कराए जाएंगे। जबकि शहरी निकायों के चुनाव EVM मशीनों से संपन्न होते हैं। चुनाव कार्यक्रम को लेकर समय सीमा भी तय है।

31 मई से पहले होंगे चुनाव

सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव 31 मई से पहले करवाने के निर्देश दिए हैं, जिसके चलते चुनाव आयोग पूरी प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूरा करने में जुटा है। इससे पहले प्रदेश में शहरी निकाय चुनाव की घोषणा भी की जा चुकी है, जिनमें 17 मई और 22 मई को मतदान प्रस्तावित है।

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ग्रामीण लोकतंत्र बेहद अहम

इन पंचायत चुनावों को ग्रामीण लोकतंत्र के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य जैसे पांच प्रमुख पदों के लिए प्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा।

31 जनवरी को खत्म हुआ कार्यकाल

गौरतलब है कि प्रदेश की पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो गया था, जिसके बाद फिलहाल पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए गए हैं। ऐसे में इन चुनावों के जरिए गांवों में फिर से चुनी हुई सरकारों की वापसी होगी।

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राजनीतिक माहौल भी गरमाया

चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राजनीतिक माहौल भी गरमाने लगा है। संभावित उम्मीदवार अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुट गए हैं, वहीं सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार पहले ही तेज हो चुका है। आने वाले दिनों में स्थानीय मुद्दों पर बहस और जनसंपर्क अभियान और तेज होने की संभावना है।

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