शिमला। हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती को लेकर चली आ रही लंबी बहस अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। बीते वर्षों में अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में इस विषय पर पहल और चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन अब सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार इसे ठोस नीति और कानून के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सरकार का दावा है कि नियंत्रित और वैज्ञानिक तरीके से भांग की खेती को अनुमति देकर किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी जाएगी।

विधानसभा में लाया जाएगा विधेयक

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने सदन में बताया कि भांग की नियंत्रित एवं वैज्ञानिक खेती को लेकर सरकार ने नीति तैयार कर ली है। इसे लागू करने के लिए जल्द ही विधानसभा में विधेयक लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कदम औद्योगिक, औषधीय और शोध आधारित उपयोग को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है।

 

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विपक्ष से सहयोग की उम्मीद

मंत्री ने कहा कि विपक्ष लगातार भांग की खेती को लेकर सवाल उठा रहा है। ऐसे में सरकार इस सत्र के दौरान विधेयक लाने की दिशा में आगे बढ़ रही है और उम्मीद है कि विपक्ष भी इसमें सहयोग करेगा। उनके अनुसार इस नीति के लागू होने से राज्य में आय के नए स्रोत विकसित होंगे।

 

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पूरी तरह नियंत्रित और वैज्ञानिक ढांचा होगा तैयार 

सरकार का कहना है कि भांग की खेती को पूरी तरह नियंत्रित ढांचे में रखा जाएगा। खेती, उत्पादन, प्रसंस्करण और उपयोग से जुड़े सभी पहलुओं को नीति में शामिल किया गया है, ताकि किसी भी तरह के दुरुपयोग की संभावना न रहे। खेती की अनुमति केवल लाइसेंस प्रणाली के तहत ही दी जाएगी।

क्षेत्र चयन से लेकर ट्रेसबिलिटी तक व्यवस्था

नीति के तहत भांग की खेती के लिए उपयुक्त क्षेत्रों की पहचान की जाएगी। इसके साथ ही निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा और उत्पादन की पूरी ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे केवल तय उद्देश्यों के लिए ही भांग का उपयोग हो सकेगा।

 

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रोजगार और राजस्व बढ़ने की उम्मीद

नीति लागू होने के बाद औद्योगिक उत्पादों, औषधीय उपयोग और अनुसंधान के क्षेत्र में नए अवसर खुलने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए मौके पैदा होंगे, वैकल्पिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और राज्य के राजस्व में भी इजाफा होगा।

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