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August 19, 2026

हिमाचल में शुरू हुआ ‘काला महीना’: सास-बहू नहीं रहेंगी एक साथ, देवता ने बांधा रक्षा सूत्र

देवताओं और आसुरी शक्तियों के युद्ध की मान्यता

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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में भादो मास की शुरुआत के साथ ही कुल्लू घाटी में पारंपरिक देव रीति-रिवाजों का सिलसिला शुरू हो गया है। स्थानीय मान्यताओं में भादो मास को ‘काला महीना’ भी कहा जाता है।

हिमाचल में शुरू हुआ ‘काला महीना’

इस दौरान कई क्षेत्रों में देवी-देवताओं से जुड़ी विशेष परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। कुल्लू में भी ऐसी ही एक परंपरा के तहत देवता गौहरी ने अपने क्षेत्र में रक्षा सूत्र बांधा और लोगों को नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा का आशीर्वाद दिया।

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सास-बहू नहीं रहेंगी एक साथ

कुल्लू के पुरोहित विजय शर्मा के अनुसार स्थानीय मान्यता है कि भादो मास के दौरान आसुरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है। इसी विश्वास के चलते घाटी के देवी-देवता अपने-अपने क्षेत्रों में देव कार्य करते हैं और लोगों की रक्षा के लिए धार्मिक अनुष्ठानों एवं परंपराओं को पूरा करते हैं।

देवता गौहरी ने बांधा रक्षा सूत्र

कुल्लू जिला मुख्यालय ढालपुर में देवता गौहरी की ओर से विशेष देव कार्य किया गया। मान्यता के अनुसार देवता ने पूरे क्षेत्र में रक्षा सूत्र बांधकर लोगों को बुरी शक्तियों से बचाने का आशीर्वाद दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी मौजूद रहे और उन्होंने देवता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

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देवता देते हैं आशीर्वाद

देवता गौहरी के कारदार राजकुमार महंत के अनुसार भादो मास में देवता अपने क्षेत्र का भ्रमण करते हैं और लोगों के घरों तक पहुंचकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। उनका कहना है कि देवता गौहरी के प्रति स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है और इस परंपरा को लंबे समय से निभाया जाता रहा है।

बिच्छू बूटी के साथ देव खेल

भादो मास से जुड़ी इस परंपरा के दौरान महंत बेहड़ में देव खेल का आयोजन भी किया गया। देवता के गुर ने बिच्छू बूटी के साथ पारंपरिक देव खेल में हिस्सा लिया। इसके बाद श्रद्धालुओं को बिच्छू बूटी का प्रसाद वितरित किया गया।

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बुरी शक्तियों रहती हैं दूर

स्थानीय मान्यता के मुताबिक इस प्रसाद को घर ले जाने से नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है। श्रद्धालु इसे आस्था के प्रतीक के तौर पर अपने घरों में रखते हैं। मान्यता यह भी है कि इससे परिवार के सदस्यों पर बुरी शक्तियों का प्रभाव नहीं पड़ता।

घर-घर जाकर आशीर्वाद दे रहे देवता

कारदार राजकुमार महंत के मुताबिक देवता गौहरी पिछले दिन से ही क्षेत्र का भ्रमण कर रहे हैं। इस दौरान घर-घर जाकर लोगों को आशीर्वाद दिया जा रहा है। मंगलवार को भी महंत बेहड़ में देव कार्य संपन्न किया गया और श्रद्धालुओं को भादो मास के दौरान बुरी शक्तियों से बचाव की कामना के साथ आशीर्वाद दिया गया।

उन्होंने बताया कि देवता के प्रति पूरे क्षेत्र में लोगों की गहरी श्रद्धा है। भादो मास के दौरान देवता से जुड़े इन धार्मिक आयोजनों में स्थानीय लोग परंपरागत तरीके से भाग लेते हैं।

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देवताओं और आसुरी शक्तियों के युद्ध की मान्यता

पुरोहित विजय शर्मा के अनुसार भादो मास से जुड़ी लोक मान्यताओं में देवताओं और आसुरी शक्तियों के बीच संघर्ष का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि इस दौरान देवी-देवता अपने-अपने जागरण और धार्मिक आयोजनों में इस युद्ध का वर्णन करते हैं।

देवताओं और डायनों के बीच युद्ध

स्थानीय परंपरा के अनुसार देवताओं और डायनों के बीच युद्ध मंडी जिले की गोगराधार की पहाड़ी पर होने की मान्यता है। भादो मास के अंतिम दिनों में देव परंपराओं के दौरान इस युद्ध का बखान किया जाता है। इसमें यह बताया जाता है कि संघर्ष में किस पक्ष की जीत हुई।

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इन्हीं धार्मिक मान्यताओं के कारण भादो मास को कई क्षेत्रों में विशेष महत्व दिया जाता है। इस दौरान कई परिवार शुभ कार्यों को टालना पसंद करते हैं और धार्मिक परंपराओं के अनुसार ही अपनी दिनचर्या रखते हैं।

कई जगहों में शुभ कार्यों से दूरी

भादो मास को लेकर हिमाचल के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग लोक मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ जगहों पर इस पूरे महीने को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक आयोजनों को इस अवधि के बाद करने की परंपरा भी कई समुदायों में देखने को मिलती है।

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हालांकि इन मान्यताओं का स्वरूप क्षेत्र और समुदाय के अनुसार अलग हो सकता है। कुल्लू घाटी में देवी-देवताओं से जुड़ी परंपराएं आज भी स्थानीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

बहुओं के मायके जाने की भी परंपरा

पुरोहित विजय शर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भादो मास के दौरान नवविवाहित महिलाएं अपने मायके चली जाती हैं। मान्यता के अनुसार वे काला महीना समाप्त होने के बाद ही ससुराल लौटती हैं।

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इसके पीछे भी स्थानीय लोकविश्वास जुड़ा हुआ है। ऐसी मान्यता कही जाती है कि यदि भादो मास के दौरान नवविवाहित महिला और उसकी सास लंबे समय तक एक साथ रहें तो दोनों के बीच जीवनभर मनमुटाव बना रह सकता है। इसी विश्वास के चलते कुछ परिवार इस अवधि में नवविवाहित बहू को मायके भेजने की परंपरा निभाते हैं।

 

भादो मास से जुड़ी ये मान्यताएं धार्मिक आस्था के साथ-साथ हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति और देव परंपरा की झलक भी दिखाती हैं। कुल्लू जैसे देवभूमि के क्षेत्रों में देवी-देवताओं के प्रति लोगों की आस्था आज भी सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अहम हिस्सा बनी हुई है।

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