#विविध
August 19, 2026
हिमाचल: खदान में हुए भूस्खलन के मलबे में दबे थे 3 मजदूर, एक की मिली देह; दो की तलाश जारी
पहाड़ दरकने से तीन मजदूर और तीन मशीने हो गई थी मलबे में दफन
शेयर करें:

सिरमौर। हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश जमकर कहर बरपा रही है। इसी बारिश के चलते मंगलवार को सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र की कमरऊ तहसील के बागनाधार में एक खदान में भारी लैंडस्लाइड हुआ था। पहाड़ दरकने से पत्थर और मलबा नीचे आ गिरा। जिसकी चपेट में आने से तीन मजदूर दब गए थे। आज बुधवार को इन तीन में से एक मजदूर का शव बरामद कर लिया गया है।
बता दें कि खदान में अचानक पहाड़ का बड़ा हिस्सा दरकने से भारी मलबा नीचे आ गिरा, जिसकी चपेट में तीन मजदूर और मशीनरी आ गई। हादसे के बाद प्रशासन ने युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। बुधवार को लगातार चलाए गए सर्च अभियान के दौरान मलबे से एक मजदूर का शव बरामद कर लिया गया है, जबकि दो अन्य मजदूरों की तलाश अभी भी जारी है। समय बीतने के साथ मलबे में दबे दोनों मजदूरों के सुरक्षित जिंदा निकलने की उम्मीदें भी लगातार कम होती जा रही हैं।
कमरऊ क्षेत्र के बागनाधार स्थित खदान में मंगलवार को अचानक पहाड़ का एक हिस्सा खिसक गया। देखते ही देखते बड़ी मात्रा में मलबा नीचे आ गिरा। उस समय खदान में वाहन और एलएंडटी मशीन मौजूद थी। भारी मलबे की चपेट में आने से वहां काम कर रहे तीन मजदूरों के दबने की सूचना मिली। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और प्रशासन को इसकी सूचना दी गई।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : मनरेगा के पैसों में गोलमाल- JE को नौकरी से निकाला, 2 पंचायतों में 67 लाख की गड़बड़ी
हादसे के बाद मलबे में अनिल कुमार निवासी बड़वास, 65 वर्षीय गजेंद्र सिंह और 68 वर्षीय धन सिंह, दोनों नेपाल मूल के, के दबे होने की जानकारी सामने आई थी। प्रशासन, पुलिस और बचाव दल ने तुरंत सर्च अभियान शुरू कर दिया। बुधवार को कड़ी मशक्कत के बाद बचाव दल ने मलबे से अनिल कुमार का शव बरामद कर लिया। शव की पहचान अनिल कुमार निवासी बड़वास के रूप में की गई है।
एक शव मिलने के बाद अब बचाव दल का पूरा ध्यान मलबे में दबे गजेंद्र सिंह और धन सिंह की तलाश पर है। घटनास्थल पर भारी मशीनरी की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। हालांकि लगातार हो रही स्लाइडिंग के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा बना हुआ है। बचाव दल को हर कदम बेहद सावधानी से उठाना पड़ रहा है, क्योंकि पहाड़ी से लगातार मलबा और पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है।
बागनाधार में रेस्क्यू अभियान के दौरान सबसे बड़ी चुनौती लगातार हो रही स्लाइडिंग है। पहाड़ी से अचानक मलबा और पत्थर गिरने के कारण बचाव दल के लिए घटनास्थल पर काम करना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा घना कोहरा भी सर्च ऑपरेशन में बाधा बन रहा है। ऐसे हालात में बचाव कर्मियों को अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए मलबे में दबे दोनों लोगों तक पहुंचने का प्रयास करना पड़ रहा है।
प्रशासन की ओर से रेस्क्यू अभियान को और मजबूत करने के लिए एनडीआरएफ की टीम को भी लगाया जा रहा है। आवश्यक मशीनरी और अन्य संसाधन मौके पर पहुंचाए गए हैं। प्रशासन का प्रयास है कि खतरनाक परिस्थितियों के बावजूद मलबे में दबे दोनों मजदूरों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।
हादसे को हुए समय बीतने के साथ अब मलबे में दबे दोनों मजदूरों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। रेस्क्यू टीम पूरी ताकत से तलाश में जुटी है, लेकिन भारी मलबा, लगातार स्लाइडिंग और खराब मौसम अभियान को कठिन बना रहा है। परिजनों और स्थानीय लोगों की निगाहें अब रेस्क्यू अभियान पर टिकी हैं और हर कोई दोनों मजदूरों के सुरक्षित बाहर आने की उम्मीद लगाए हुए है।
वहीं, प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार मंगलवार सुबह 10 बजे तक प्रदेश में 279 सड़कें बंद थीं। इसके अलावा 310 पेयजल योजनाएं और 84 बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित रहे। सबसे ज्यादा सड़कें चंबा, मंडी, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और शिमला जिलों में प्रभावित बताई गई हैं।
भारी बारिश और खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन ने हमीरपुर के नादौन और ऊना जिले के बंगाणा उपमंडल के सभी शिक्षण संस्थानों में बुधवार को अवकाश घोषित किया है। लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है और कई स्थानों पर भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
हिमाचल प्रदेश में पिछले 24 घंटों से जारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार भूस्खलन से सड़कें बाधित हो रही हैं, जबकि पेयजल और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। बागनाधार का हादसा इसी बिगड़ते मौसम के बीच सामने आया है, जिसने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के दौरान बढ़ते भूस्खलन के खतरे को उजागर कर दिया है।