ऊना। हिमाचल प्रदेश में धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों के उपयोग को लेकर हिमाचल हाईकोर्ट के कड़े रुख का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ऊना और पुलिस विभाग ने वे वाहन वापस कर दिए हैं।
मंदिर को वापस मिली गाड़ियां
यह गाड़िया वहीं हैं- जो माता चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट के कोष से खरीदी गई थी। बुधवार को आदेशों की अनुपालना करते हुए ये सभी वाहन मंदिर न्यास के सुपुर्द कर दिए गए और उन्हें यात्री निवास परिसर में सुरक्षित खड़ा कर दिया गया है।
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कोर्ट ने जताई थी सख्त नाराजगी
यह पूरा मामला एक जनहित याचिका के बाद सामने आया था। जिस पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मंदिर संपत्तियों के उपयोग पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
चढ़ावे से खरीदी गई गाड़ियां
याचिका में आरोप लगाया गया था कि श्रद्धालुओं के दान से खरीदी गई एक इनोवा क्रिस्टा का उपयोग उपायुक्त ऊना द्वारा किया जा रहा था। जबकि मंदिर को दान में मिली बोलेरो गाड़ी पुलिस विभाग के SHO के पास थी।
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कहां इस्तेमाल होगा दान का पैसा?
अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े संसाधनों का इस्तेमाल केवल धार्मिक कार्यों और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं के लिए होना चाहिए। इन्हें सरकारी कामकाज या अधिकारियों की सुविधा के लिए इस्तेमाल करना पूरी तरह अनुचित है।
DC-SHO ने वापस दी गाड़ियां
कोर्ट ने प्रशासन को पांच दिनों के अंदर सभी वाहनों को मंदिर न्यास को लौटाने और उनकी सुरक्षित देखरेख सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन ने तुरंत कदम उठाते हुए वाहनों को वापस कर दिया। इस कार्रवाई को धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों के संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
