शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार को एक बार फिर हाईकोर्ट की नाराजगी का सामना करना पड़ा है। सरकारी अधिकारियों के बार-बार किए जा रहे तबादलों को लेकर हिमाचल हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को सख्त नसीहत दी है।

 

अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि किसी अधिकारी के क्लास-1 पद पर होने का मतलब यह नहीं है कि विभाग उसे बिना किसी ठोस वजह के बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजता रहे। हाईकोर्ट ने सरकार को क्लास-1 अधिकारियों के लिए भी न्यूनतम कार्यकाल तय करने और तबादलों को लेकर स्पष्ट व वस्तुनिष्ठ दिशा-निर्देश बनाने के निर्देश दिए हैं।

बार-बार ट्रांसफर पर अदालत ने उठाए सवाल

यह मामला मंडी जिले के बाली चौकी में तैनात बबनेश चड्ढा से जुड़ा है। उनके तबादले को चुनौती देते हुए दायर सिविल रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने अधिकारी के पिछले कुछ वर्षों में हुए तबादलों का रिकॉर्ड आया। अदालत ने इन परिस्थितियों को देखते हुए माना कि किसी अधिकारी को वर्तमान तैनाती स्थल पर उचित समय तक सेवाएं देने का अवसर दिए बिना बार-बार तबादला करना उचित नहीं ठहराया जा सकता।

 

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1 जुलाई 2026 के तबादला आदेश को किया रद्द

विभाग की ओर से 1 जुलाई 2026 को बबनेश चड्ढा का बाली चौकी से अन्य स्थान पर तबादला करने का आदेश जारी किया गया था। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत में हुई। अदालत ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद संबंधित तबादला आदेश को रद्द कर दिया।

बाली चौकी में अभी पूरा नहीं हुआ था कार्यकाल

सुनवाई के दौरान अदालत को पता चला कि याचिकाकर्ता बाली चौकी में अभी करीब 1 वर्ष 11 महीने ही सेवाएं दे पाए थे। इससे पहले भी उनके कार्यकाल के दौरान लगातार स्थानांतरण होते रहे। रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 1 जुलाई 2020 से 16 सितंबर 2021 तक करसोग, जिला मंडी में सेवाएं दीं। इसके बाद 6 सितंबर 2021 से 6 अप्रैल 2023 तक आनी, जिला कुल्लू में तैनाती रही। इसके बाद वह बाली चौकी में तैनात हुए।

 

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क्लास-1 अधिकारी होना बार-बार ट्रांसफर का आधार नहीं

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी का क्लास-1 अधिकारी होना विभाग को यह अधिकार नहीं देता कि उसे बिना उचित आधार के लगातार स्थानांतरित किया जाता रहे। अदालत ने माना कि अधिकारियों को भी एक तैनाती स्थल पर सम्मानजनक और उचित कार्यकाल पूरा करने का अवसर मिलना चाहिए। लगातार कम अवधि में तबादले से न केवल प्रशासनिक स्थिरता प्रभावित होती है, बल्कि अधिकारी को भी अपना काम प्रभावी तरीके से करने में परेशानी हो सकती है।

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सरकार को न्यूनतम कार्यकाल तय करने की नसीहत

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि क्लास-1 अधिकारियों के लिए भी न्यूनतम कार्यकाल निर्धारित किया जाए। इसके साथ ही तबादलों के लिए ऐसे स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं, जिनसे यह सुनिश्चित हो सके कि अधिकारियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रहे।

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बाली चौकी में ढाई से तीन साल पूरा करेंगे अधिकारी

अदालत ने संबंधित विभाग को यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता बबनेश चड्ढा को बाली चौकी में कम से कम ढाई से तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा करने दिया जाए। इसके बाद ही प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उनके तबादले पर विचार किया जा सकेगा।

तबादला नीति में पारदर्शिता पर हाईकोर्ट का जोर

हाईकोर्ट के इस आदेश को सरकारी अधिकारियों के तबादलों से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है। अदालत ने अपने आदेश के जरिए यह संदेश दिया है कि प्रशासनिक जरूरतों के नाम पर अधिकारियों के लगातार तबादले मनमाने तरीके से नहीं किए जा सकते। सरकार को तबादलों में स्पष्ट नियम, न्यूनतम कार्यकाल और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाने होंगे।

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