शिमला। हिमाचल प्रदेश बीते काफी समय से भूकंप के खतरों से जूझता आया है। इसी खतरे को देखते हुए प्रदेश सरकार ने अब भवन निर्माण को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भूकंप के खतरे को देखते हुए प्रदेश सरकार ने सुरक्षित और मजबूत निर्माण को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) के नियमों को सख्ती से लागू करने का फैसला लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों की जान-माल की सुरक्षा करना और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान होने वाले नुकसान को कम करना है।


पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल प्रदेश में भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है। प्रदेश के कई इलाके भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। पिछले कई वर्षों में हिमाचल में भूकंप के झटके महसूस किए जाते रहे हैं, जिसके चलते भवनों की मजबूती और सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। अब सरकार ने इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए भवन निर्माण के नियमों को और सख्त करने की तैयारी की है।

भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में होगी खास निगरानी

हिमाचल प्रदेश में कई क्षेत्र भूकंपीय जोन-4 और जोन-5 में आते हैं, जहां भूकंप का खतरा ज्यादा माना जाता है। ऐसे इलाकों में बनने वाले भवनों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। सरकार चाहती है कि नए भवन इस तरह बनाए जाएं कि भूकंप के तेज झटकों को सहन कर सकें और लोगों की सुरक्षा बनी रहे।

 

यह भी पढ़ें : IND vs AFG: वनडे मैच पर बारिश का साया, इंद्रुनाग के दर पहुंचे अनुराग संग HPCA; मांगा आशीर्वाद

 

अब किसी भी नए भवन को बनाने से पहले उसकी डिजाइन और मजबूती की जांच की जाएगी। योग्य इंजीनियर यह सुनिश्चित करेंगे कि भवन निर्माण के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है या नहीं।

निजी और सरकारी सभी भवनों पर लागू होंगे नियम

सरकार के नए निर्देशों के अनुसार केवल सरकारी भवन ही नहीं, बल्कि निजी मकान, संस्थान, स्कूल, अस्पताल और व्यावसायिक भवनों को भी भूकंपरोधी नियमों के अनुसार बनाना जरूरी होगा। बड़े भवनों के निर्माण से पहले उनकी संरचनात्मक सुरक्षा की जांच करवाई जाएगी। इसके अलावा बड़े प्रोजेक्टों के लिए थर्ड पार्टी स्ट्रक्चरल वेरिफिकेशन भी किया जाएगा, ताकि निर्माण में किसी भी तरह की लापरवाही न हो।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: ट्रैक्टर की चपेट में आने से 10 साल के मासूम की मौ*त, परिवार ने खो दिया लाडला बेटा

निर्माण से जुड़े लोगों को दी जाएगी ट्रेनिंग

भूकंपरोधी भवन बनाने के लिए केवल नियम बनाना ही नहीं, बल्कि निर्माण कार्य से जुड़े लोगों को सही जानकारी देना भी जरूरी है। इसी को देखते हुए सरकार राजमिस्त्रियों, सरिया लगाने वाले कारीगरों और अन्य मजदूरों को आधुनिक निर्माण तकनीकों की ट्रेनिंग देगी। प्रशिक्षण के बाद कामगारों को प्रमाणन भी दिया जाएगा, ताकि वे सुरक्षित तरीके से भवन निर्माण कर सकें। इससे भवनों की गुणवत्ता बेहतर होगी और गलत निर्माण की संभावना कम होगी।

स्कूल, अस्पताल और जरूरी भवनों की होगी सुरक्षा जांच

सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि लोगों की सुविधा से जुड़े महत्वपूर्ण भवनों की नियमित जांच की जाएगी। इनमें अस्पताल, स्कूल, सरकारी कार्यालय और आपदा के समय इस्तेमाल होने वाले आपातकालीन केंद्र शामिल हैं। इन भवनों की सुरक्षा ऑडिट करवाई जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर ये इमारतें आपदा के समय लोगों के लिए सुरक्षित रह सकें।

 

यह भी पढ़ें : सीएम सुक्खू का ड्रीम प्रोजेक्ट ADB करेगा पूरा, दी मंजूरी; 2200 करोड़ से बदलेगी हिमाचल की तस्वीर

नियमों की अनदेखी करने वालों पर होगी कार्रवाई

प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि भवन निर्माण में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ठेकेदारों, इंजीनियरों, आर्किटेक्ट और संबंधित अधिकारियों को राष्ट्रीय भवन संहिता के सभी नियमों का पालन करना होगा। अगर कोई व्यक्ति या संस्था सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज करती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि मजबूत नियमों से ही सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा दिया जा सकता है।

सुरक्षित और मजबूत हिमाचल बनाने की कोशिश

सरकार का मानना है कि इन नए नियमों से हिमाचल प्रदेश में भवनों की मजबूती बढ़ेगी। भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय जान-माल का नुकसान कम होगा और लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा। भविष्य में प्रदेश में ऐसे भवन तैयार किए जाएंगे जो लंबे समय तक टिकाऊ रहें और प्राकृतिक चुनौतियों का सामना कर सकें। यह कदम हिमाचल को सुरक्षित, मजबूत और बेहतर निर्माण व्यवस्था की ओर ले जाने वाला माना जा रहा है।