शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने और प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से डीजल आधारित बसों की जगह चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बढ़ा रही है। इसी कड़ी में हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) को 150 नई इलेक्ट्रिक बसें मिल चुकी हैं, जिन्हें जल्द ही विभिन्न रूटों पर उतारा जाएगा। इन बसों के संचालन से न केवल ईंधन पर होने वाला खर्च कम होगा, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में सार्वजनिक परिवहन को अधिक आधुनिकए किफायती और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के गृह जिलों में दौड़ेंगी सबसे अधिक बसें
नई इलेक्ट्रिक बसों के आवंटन में सबसे अधिक बसें ऊना और हमीरपुर जिलों को दी गई हैं। दोनों जिलों को 35-35 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की गई हैं। खास बात यह है कि हमीरपुर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का गृह जिला है, जबकि ऊना उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का गृह जिला है। एचआरटीसी का कहना है कि बसों का आवंटन भौगोलिक परिस्थितियों और सड़क नेटवर्क को ध्यान में रखकर किया गया है। इन दोनों जिलों में अपेक्षाकृत बेहतर और समतल सड़कें हैं, जहां इलेक्ट्रिक बसों का संचालन अधिक प्रभावी और सुरक्षित माना जा रहा है।
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खराब सड़कों वाले रूटों पर नहीं चलेंगी ई-बसें
एचआरटीसी प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि नई इलेक्ट्रिक बसों को फिलहाल उन मार्गों पर नहीं चलाया जाएगा जहां सड़कें अत्यधिक खराब हैं या जहां लगातार तीखी चढ़ाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां हैं। निगम का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के बेहतर प्रदर्शन और लंबी आयु के लिए उन्हें ऐसे रूटों पर चलाना जरूरी है जहां सड़कें अच्छी स्थिति में हों। इसी कारण मैदानी क्षेत्रों, शहरों के आसपास के मार्गों और बेहतर सड़क नेटवर्क वाले इलाकों को प्राथमिकता दी जा रही है।
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297 बसों की खरीद प्रक्रिया जारी
एचआरटीसी ने कुल 297 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। इनमें से लगभग 150 बसें निगम को प्राप्त हो चुकी हैं, जबकि शेष बसें भी चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएंगी। नई बसों को विभिन्न डिपो में भेजा जा चुका है और तकनीकी निरीक्षण तथा अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इन्हें यात्रियों की सेवा में लगाया जाएगा।
मुख्यमंत्री दिखाएंगे हरी झंडी
निगम प्रबंधन इन बसों के औपचारिक संचालन की शुरुआत मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के हाथों करवाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए सरकार से समय मांगा गया है। हरी झंडी मिलने के बाद इलेक्ट्रिक बसों का बड़ा बेड़ा प्रदेश की सड़कों पर नजर आएगा।
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किन जिलों को मिली कितनी बसें?
एचआरटीसी द्वारा तैयार की गई योजना के अनुसार ऊना और हमीरपुर को सबसे अधिक 35-35 बसें दी गई हैं। इसके अलावा बिलासपुर को 20, नालागढ़ और नाहन को 15-15, देहरा और पालमपुर को 10-10, जबकि धर्मशाला और तारादेवी डिपो को पांच-पांच इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की गई हैं। अन्य डिपो को भी आवश्यकता और रूट की स्थिति के अनुसार बसें उपलब्ध कराई जाएंगी।
ट्रायल में फेल हुए रूट की होगी जांच
नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से पहले कई मार्गों पर परीक्षण किया गया था। परीक्षण के दौरान एक मार्ग पर बस अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई। कंपनी ने इसके लिए सड़क की खराब स्थिति को जिम्मेदार ठहराया है। इस मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए एचआरटीसी ने एक विशेष जांच समिति गठित की है। समिति में लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों को भी शामिल किया गया है, जो सड़क की स्थिति और बस संचालन की व्यवहारिकता का आकलन करेंगे।
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परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों का बढ़ता उपयोग हिमाचल के परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। पहाड़ी राज्य होने के बावजूद सरकार स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन मॉडल को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो डीजल बसों की जगह इलेक्ट्रिक बसों की संख्या लगातार बढ़ाई जा सकती है, जिससे यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी लाभ मिलेगा।
ग्रीन हिमाचल की ओर बढ़ते कदम
राज्य सरकार की यह पहल ग्रीन हिमाचल के विजन को मजबूती देने वाली मानी जा रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर सरकार प्रदूषण कम करने, ईंधन पर निर्भरता घटाने और परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है।
