शिमला। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित रामपुर की पोक्सो अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए कड़ी सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों को 20-20 वर्ष के कारावास की सजा दी है। इसके साथ ही दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत का यह फैसला 26 सितंबर 2026 को सुनाया गया।
रामलीला देख लौट रही किशोरी का किया था अपहरण
अभियोजन के अनुसार घटना 26 सितंबर 2025 की रात की है। किशोरी शाम के समय रामलीला देखने गई थी। रात करीब 9:30 बजे वह अकेली अपने क्वार्टर की तरफ लौट रही थी।
इसी दौरान रास्ते में एक पिकअप उसके पास आकर रुकी। आरोप है कि वाहन में सवार तबरेज आलम उर्फ बिराज ने किशोरी को जबरन वाहन में बैठा लिया। इसके बाद दोनों आरोपी उसे लेकर जंगल की तरफ चले गए। जंगल में वाहन रोकने के बाद दोनों आरोपियों ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। अभियोजन के अनुसार पीड़िता द्वारा शोर मचाने के बाद उसे सड़क पर उतार दिया गया।
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शिकायत के बाद शुरू हुई पुलिस जांच
घटना के बाद मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंची। पुलिस ने संबंधित धाराओं और पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाए और आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (पोक्सो कोर्ट), किन्नौर स्थित रामपुर में हुई।
15 गवाहों के बयान बने अभियोजन का आधार
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष कुल 15 गवाहों के बयान दर्ज करवाए। अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने तबरेज आलम उर्फ बिराज, निवासी पश्चिम चंपारण, बिहार और लखिन्द्र उर्फ लक्की, निवासी गरंगे, निचार, जिला किन्नौर को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। दोनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
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कौन हैं दोनों दोषी?
अदालत से सजा पाने वाले आरोपियों की पहचान 26 वर्षीय तबरेज आलम उर्फ बिराज, निवासी पश्चिम चंपारण, बिहार और 24 वर्षीय लखिन्द्र उर्फ लक्की, निवासी गरंगे, निचार, जिला किन्नौर के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला चलाया गया।
एक साल बाद आया अदालत का फैसला
घटना सितंबर 2025 में हुई थी और मामले की जांच पूरी होने के बाद अभियोजन ने अदालत में चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने मामले के समर्थन में 15 गवाह पेश किए। लगभग एक साल बाद 26 सितंबर 2026 को अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया और 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
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सरकार की ओर से कमल चंदेल ने की पैरवी
मामले में सरकार की ओर से उप जिला न्यायवादी कमल चंदेल ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष मामले से जुड़े साक्ष्य और गवाहों को पेश किया। अदालत द्वारा दोनों आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद मामले में सख्त सजा सुनाई गई है।
