ऊना। हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ जारी जंग अब तस्करों की अवैध कमाई तक पहुंच गई है। पुलिस न केवल नशे का कारोबार करने वालों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज रही है, बल्कि नशे के काले कारोबार से खड़ी की गई संपत्ति पर भी शिकंजा कस रही है। इसी कड़ी में ऊना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नशा तस्करी से जुड़े चार मामलों में कुल 1 करोड़ 57 लाख 2 हजार 432 रुपये की संपत्ति फ्रीज करने की कार्रवाई की है। इस संपत्ति में तीन ट्रक, कृषि भूमि, वाहन और बैंक खातों में जमा धनराशि शामिल है। पुलिस की इस कार्रवाई को नशा तस्करों के आर्थिक साम्राज्य पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
नशे की कमाई से खड़ा किया संपत्ति का साम्राज्य
नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई में अब पुलिस का फोकस केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी और आरोपितों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। तस्करी के जरिए जुटाई गई संपत्ति का पता लगाकर उस पर कानूनी कार्रवाई करना भी रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है। ऊना में सामने आए मामलों में पुलिस ने आरोपितों की संपत्तियों और बैंक खातों की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास किया कि उनकी आर्थिक स्थिति और घोषित आय के बीच कितना अंतर है।
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तस्कर के पास कौन सा मिला था नशा और कितना
मैहतपुर पुलिस थाने में दर्ज एक मामले में चड़तगढ़ निवासी कुलविंदर सिंह से 122.960 किलोग्राम भुक्की बरामद की गई थी। इस मामले में आगे बढ़ते हुए पुलिस ने आरोपित की वित्तीय स्थिति की जांच की। जांच के दौरान उसकी आय का कोई स्पष्ट स्रोत सामने नहीं आया, जबकि उसके नाम पर तीन ट्रक होने की जानकारी मिली। पुलिस ने मामले से जुड़ी वित्तीय जांच के आधार पर ट्रकों और बैंक खातों से संबंधित कुल 52 लाख 6 हजार 366 रुपये की संपत्ति फ्रीज करने की कार्रवाई की। यह कार्रवाई दर्शाती है कि नशा तस्करी के मामलों में अब आरोपितों की संपत्ति और आर्थिक लेन-देन की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
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जमीन, वाहन और बैंक खातों पर भी कार्रवाई
सदर ऊना पुलिस थाने के अंतर्गत संतोषगढ़ निवासी बलविंद्र कुमार से 25.30 किलोग्राम भुक्की बरामद की गई थी। इस मामले में पुलिस ने नशीले पदार्थ की बरामदगी के बाद आरोपित की संपत्ति और आर्थिक स्रोतों की जांच की। जांच के दौरान आरोपित के नाम पर करीब दो हजार वर्ग मीटर कृषि भूमि, एक हल्का वाहन और बैंक खातों में जमा धनराशि का पता चला। पुलिस ने इन संपत्तियों से संबंधित कुल 19 लाख 21 हजार 54 रुपये की राशि की संपत्ति फ्रीज करने की कार्रवाई की। इस मामले में भी पुलिस का जोर नशा तस्करी से जुड़े आर्थिक पहलुओं की जांच कर अवैध कमाई पर अंकुश लगाने पर रहा।
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दो अन्य मामलों में 71 लाख की संपत्ति पर कार्रवाई
ऊना पुलिस ने नशा तस्करी से जुड़े दो अन्य एनडीपीएस मामलों में भी बड़ी वित्तीय कार्रवाई की है। इन दोनों मामलों में कुल 71 लाख 27 हजार 420 रुपये की संपत्ति को फ्रीज करने की कार्रवाई की गई है। इस तरह चार मामलों में की गई कार्रवाई के जरिए पुलिस ने कुल 1.57 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को निशाने पर लिया है।
पहले भी 85ण्75 लाख की संपत्ति हो चुकी है जब्त
ऊना पुलिस इससे पहले भी नशा तस्करी से जुड़ी संपत्तियों पर वित्तीय कार्रवाई कर चुकी है। पूर्व में 85 लाख 75 हजार 12 रुपये की संपत्ति से संबंधित कार्रवाई को पिछले माह सक्षम प्राधिकारी, दिल्ली से पुष्टि मिल चुकी है। इससे स्पष्ट है कि पुलिस नशे के अवैध कारोबार से अर्जित संपत्ति के मामलों को केवल शुरुआती जांच तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उन्हें निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे भी बढ़ा रही है। अब नई कार्रवाई के जरिए पुलिस ने वित्तीय जांच का दायरा और व्यापक किया है।
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इस साल एनडीपीएस के 80 मामले, 134 आरोपित गिरफ्तार
ऊना जिले में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के आंकड़े भी अभियान की व्यापकता को दर्शाते हैं। इस वर्ष अब तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 80 मामले दर्ज किए गए हैं और 134 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। इस दौरान पुलिस ने 1.583 किलोग्राम हेरोइन, 493.63 किलोग्राम भुक्की, 2.70 किलोग्राम चरस, 9.09 किलोग्राम गांजा और 196 ग्राम अफीम बरामद की है। इसके अतिरिक्त 9 लाख 19 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं।
गिरफ्तारी से आगे बढ़कर अवैध कमाई पर चोट करना बड़ी चुनौती
नशा तस्करी के खिलाफ किसी भी अभियान की सफलता केवल दर्ज मामलों या गिरफ्तार आरोपितों की संख्या से तय नहीं होती। इसके लिए जरूरी है कि नशीले पदार्थों की आपूर्ति के स्रोत कमजोर हों, तस्करी से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई हो और युवाओं तक नशा पहुंचाने वाली व्यवस्था को तोड़ा जा सके।
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पुलिस अधीक्षक ऊना सचिन हिरेमठ ने स्पष्ट किया है कि नशा तस्करों के खिलाफ गिरफ्तारियों, वित्तीय जांच और सप्लाई चेन पर कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस की कोशिश है कि नशे का कारोबार करने वालों के साथ-साथ उन्हें आर्थिक मजबूती देने वाले पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसा जाए, ताकि जिले में नशे की आपूर्ति पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
