सोलन। सरकारी काम सही और सुरक्षित तरीके से चले, इसके लिए सख्त नियम बनाए जाते हैं, लेकिन कुछ लोग इनमें गड़बड़ी कर देते हैं। ऐसा ही मामला सोलन जिले से सामने आया है, जहां वाहन रजिस्ट्रेशन से जुड़ा बड़ा साइबर घोटाला पकड़ा गया है। इस मामले में सरकारी सिस्टम से छेड़छाड़ करने वाले मास्टरमाइंड को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
गड़बड़ियों को लेकर दर्ज करवाई शिकायत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला जिला सोलन से सामने आया है। इस मामले का उस समय हुआ जब R&LA सोलन की अधिकारी डॉ. पूनम बंसल ने रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में हो रही गंभीर गड़बड़ियों को लेकर शिकायत दर्ज करवाई।
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VAHAN पोर्टल के साथ हो रही थी छेड़छाड़
जांच शुरू हुई तो चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। पता चला कि सरकारी VAHAN पोर्टल के साथ अवैध तरीके से छेड़छाड़ की जा रही थी। फर्जी यूज़र ID बनाकर गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा था, उनका वजन बढ़ाया जा रहा था और मालिकाना हक भी बिना नियमों के बदला जा रहा था। यानी बिना सही प्रक्रिया के ही गाड़ियों के कागजों में मनमानी तरीके से बदलाव किए जा रहे थे।
सिस्टम की बड़ी चुक से आरोपियों ने उठाया फायदा
सबसे हैरानी की बात यह रही कि यह पूरा रैकेट सरकारी नेटवर्क के बाहर से ऑपरेट हो रहा था। इससे साफ है कि सिस्टम की सुरक्षा में बड़ी चूक हुई और कुछ लोग इसका गलत फायदा उठा रहे थे।
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एजेंटों का एक पूरा नेटवर्क कर रहा था काम
जांच में यह भी सामने आया कि इस काम के लिए एजेंटों का एक पूरा नेटवर्क बना हुआ था। ये एजेंट वाहन मालिकों से मोटी रकम वसूलते थे और बदले में उनके वाहनों के दस्तावेजों में अवैध बदलाव करवा देते थे, जैसे लोडेड वेट बढ़ाना, हाइपोथिकेशन (लोन) हटाना या बिना सही प्रक्रिया के वाहन ट्रांसफर करना।
6 आरोपी हो चुकें हैं गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने DSP अशोक चौहान के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। टीम ने तकनीकी जांच जैसे IP लॉग्स, OTP रिकॉर्ड और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की मदद से पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया। अब तक इस मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड गिरफ्तार
इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड गौरव भारद्वाज बताया जा रहा है, जो काफी समय से फरार चल रहा था। आखिरकार 30 अप्रैल को पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका भी दायर की थी, लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया।
करोड़ों का हो रहा था लेन-देन
जांच के दौरान पुलिस को करोड़ों रुपये के लेन-देन के सबूत भी मिले हैं, जिससे साफ होता है कि यह एक बड़ा संगठित आर्थिक अपराध है। फिलहाल पुलिस बाकी आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और गिरफ्तार लोगों से पूछताछ जारी है, ताकि इस पूरे नेटवर्क की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
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पुलिस कर रही मामले की जांच
पुलिस ने साफ कहा है कि इस घोटाले में शामिल किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। सभी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
