सिरमौर। हिमाचल प्रदेश में दुष्कर्म और पॉक्सो से जुड़े एक मामले में शिमला की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी पति के साथ उसके माता-पिता को भी सभी आरोपों से बरी कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता की उम्र को लेकर सामने आए तथ्यों ने पूरे केस की दिशा ही बदल दी।

2023 में नाबालिग को भगाने और दुष्कर्म का था आरोप

मामले में ढली थाना में दर्ज एफआईआर के अनुसार राजगढ़, सिरमौर निवासी आरोपी पर आरोप था कि उसने वर्ष 2023 में नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद पीड़िता ने एक बच्ची को जन्म दिया। आरोपी के माता-पिता पर भी पीड़िता को धमकाने और बेटे का साथ देने के आरोप लगाए गए थे।

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कोर्ट में अपने पुराने बयान से मुकर गई पीड़िता

मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अपने पहले दिए गए बयानों से अलग बात कही। उसने अदालत को बताया कि उसका जन्म 17 नवंबर 2004 को हुआ था। पीड़िता के मुताबिक उसने बालिग होने के बाद वर्ष 2024 में अपनी मर्जी से आरोपी से शादी की थी। उसने यह भी बताया कि दोनों परिवारों के बीच विवाद होने के कारण वह अपने मायके चली गई थी, लेकिन अब वह अपने पति के साथ खुशी से रह रही है।

दस्तावेजों में भी सामने आई अलग जन्मतिथि

बचाव पक्ष ने अदालत में कुछ दस्तावेज पेश किए, जिनसे पीड़िता की उम्र को लेकर अभियोजन पक्ष के मामले पर सवाल खड़े हुए। दस्तावेजों के अनुसार पीड़िता की मां ने पहले SDM और तहसीलदार के सामने दिए शपथ पत्रों में उसकी जन्मतिथि 17 नवंबर 2004 बताई थी। वहीं पंचायत के जन्म रजिस्टर में भी पीड़िता के जन्म से जुड़ा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

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नाबालिग साबित नहीं हुई तो कमजोर पड़ा पॉक्सो का मामला

अदालत ने सभी दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और बयानों में सामने आए अंतर को देखा। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं दे सका कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। उम्र का यह तथ्य साबित नहीं होने के कारण पॉक्सो एक्ट के आरोपों का आधार भी कमजोर हो गया।

पति, सास और ससुर को सभी आरोपों से किया बरी

मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जरूरी तथ्य और सबूत साबित नहीं होने के कारण अदालत ने आरोपी पति, उसके पिता और मां को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने तीनों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।