कांगड़ा/चंबा। हिमाचल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से जुड़े एक कथित घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिन लाभार्थियों का निधन हो चुका था, उनके खातों से भी लंबे समय तक पेंशन की रकम निकाली जाती रही। मामला सामने आने के बाद CBI ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए चंबा जिले में एक सब-पोस्टमास्टर के आवास पर छापेमारी की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं।

मृत लाभार्थियों के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग

जानकारी के अनुसार, यह मामला कांगड़ा जिले में सामाजिक सुरक्षा पेंशन वितरण से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि मृत लाभार्थियों के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया और इस प्रक्रिया को लंबे समय तक अंजाम दिया जाता रहा। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दर्जनों मृत लाभार्थियों के खातों से लाखों रुपये की पेंशन राशि निकाली गई।

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सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के अनुसार मृत घोषित हो चुके 19 लोगों के खातों से करीब 9 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाले जाने के प्रमाण मिले हैं। आरोप मंड मंजवां शाखा डाकघर से जुड़े एक शाखा डाक अधिकारी पर लगे हैं, जो कई वर्षों से वहां तैनात था। जांच में यह भी सामने आया है कि लाभार्थियों की मृत्यु के बाद भी उनके बैंक और डाक खातों को सक्रिय दिखाकर निकासी की जाती रही।

फर्जी दस्तावेज किए गए तैयार

जांच एजेंसी को आशंका है कि धन निकालने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और कथित तौर पर नकली अंगूठे के निशान तथा अन्य रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया। इन दस्तावेजों के आधार पर सरकारी पेंशन राशि निकालकर निजी लाभ के लिए उपयोग करने की बात सामने आई है।

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सीबीआई की पड़ताल में यह भी पता चला है कि कथित अनियमितताएं जून 2024 से सितंबर 2025 के बीच लगातार चलती रहीं। शिकायत मिलने के बाद एजेंसी ने पहले गोपनीय सत्यापन किया और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की।

संदिग्ध अधिकारी के आवास पर छापेमारी

इसी क्रम में चंबा में एक संदिग्ध अधिकारी के आवास पर छापेमारी की गई। जांच टीम ने पेंशन भुगतान रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज, खातों से संबंधित कागजात और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे मामले में केवल एक व्यक्ति शामिल था या फिर किसी बड़े नेटवर्क ने मिलकर इस कथित गड़बड़ी को अंजाम दिया।

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फिलहाल सीबीआई बैंक रिकॉर्ड, डाक विभाग के वित्तीय लेन-देन, डिजिटल दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है। साथ ही विभागीय लापरवाही या संभावित मिलीभगत की भी पड़ताल की जा रही है। मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और लोग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

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