शिमला। हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होती जा रही हैं। कुर्सी मिलते ही कुछ लोग सबसे पहले अपनी जेब कैसे भरी जाए, यही सोचते हैं। ऐसा ही एक भ्रष्टाचार पंचायत स्तर पर हुआ है। जिसमें पंचायत प्रधान ने कुर्सी मिलने के बाद मनरेगा से लेकर अन्य कार्यों में जमकर धांधली की। जिसका खामियाजा अब उसे निलंबित होकर चुकाना पड़ा है।
किस पंचायत का प्रधान हुआ सस्पेंड
दरअसल मामला राजधानी शिमला के विकासखंड रोहड़ू की पंचायत करासा से सामने आया है। करासा पंचायत के प्रधान देव राज को डीसी शिमला ने तुरंत प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए हैं। पंचायत प्रधान पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम और 15वें वित्त आयोग के तहत किए जाने वाले विकास कार्यों में अनियमिताएं बरतने के आरोप हैं। यह भी पढ़ें : करवाचौथ की तैयारियों में जुटे थे पति-पत्नी, कार ने मार दी टक्कर, देखें वीडियोप्रधान पर क्या क्या लगे थे आरोप
- पंचायत प्रधान पर विकास कार्यों के फर्जी बिल बनाने के आरोप
- प्रधान ने सामान की खरीददारी में अनियमिताएं बरती
- कार्यों के बजट को स्थानांतरित करने के आरोप
- अधूरे कार्यों
- मजदूरों के खातों में सीधे मजदूरी न ट्रांसफर करने
- एक ही व्यक्ति को बिना कोटेशन के कार्य आवंटित करने
- बिना बजट के अत्याधिक कार्य करवाने
- तकनीकी अनुमति के बिना कार्य करने आदि की अनियमिताएं जांच में सामने आई है।
