कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के बैजनाथ क्षेत्र की एक पंचायत में बरसात से मकान को हुए नुकसान के नाम पर सरकारी मुआवजा हासिल करने से जुड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि मुआवजे की राशि प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
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शिकायत के आधार पर पुलिस ने एक महिला समेत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एफआईआर में तत्कालीन पंचायत प्रधान, उपप्रधान, वार्ड पंच और संबंधित पटवारी के नाम भी शामिल हैं।
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महिला ने किया खेला
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में बरसात के दौरान संबंधित महिला के मकान को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई थी। इसी नुकसान के आधार पर सरकारी राहत राशि हासिल करने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई।
गांववाले ने की शिकायत
शिकायतकर्ता मदन लाल का आरोप है कि मकान के नुकसान से संबंधित दस्तावेजों में वास्तविक स्थिति से अलग जानकारी प्रस्तुत की गई और इन्हीं कागजात के आधार पर मुआवजे की मांग की गई।
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हड़पे 4.50 लाख रुपये
शिकायत में बताया गया है कि संबंधित मकान के लिए करीब सात लाख रुपये के मुआवजे से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए थे। इनमें से 4.50 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई। शिकायतकर्ता ने पुलिस के समक्ष आरोप लगाया कि यह भुगतान कथित तौर पर फर्जी या गलत दस्तावेजों के आधार पर हासिल किया गया। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पटवारी और प्रधान पर केस
मदन लाल ने इस संबंध में 18 अगस्त को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की जांच शुरू की। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत पुलिस ने महिला के अलावा उस समय पंचायत में पद पर रहे प्रधान, उपप्रधान और वार्ड पंच तथा संबंधित पटवारी को भी मामले में आरोपी बनाया है।
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जांच में जुटी टीम
अब जांच के दौरान पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि मुआवजे के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेज किसने तैयार किए और उनमें दर्ज जानकारी की सत्यता क्या थी। इसके साथ ही मकान को वास्तव में कितना नुकसान हुआ था, इसका आकलन किस आधार पर किया गया और मुआवजा स्वीकृत होने की प्रक्रिया में किन अधिकारियों या पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका रही, इसकी भी पड़ताल की जाएगी।
क्या बोले DSP?
DSP बैजनाथ संदीप शर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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मामले की जांच कर रही पुलिस
फिलहाल मामला पुलिस जांच के अधीन है। दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मुआवजा लेने के लिए वास्तव में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ था या नहीं और आरोपियों की भूमिका क्या रही। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
