शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से एक बेहद दुखद और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां अन्नाडेल क्षेत्र में एक छात्र ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है।

12वीं कक्षा के छात्र ने की आत्महत्या

यह घटना ठाकुर बाग इलाके की बताई जा रही है, जिसने पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बीती 4 मई को 112 हेल्पलाइन पर सूचना प्राप्त हुई कि एक युवक ने आत्महत्या कर ली है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : सड़क किनारे खेल रही थी 4 साल की मासूम, सामने से आई कार ने मारी टक्कर- तोड़ा दम

दोस्त ने हेल्पलाइन पर किया फोन

सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। अन्नाडेल के ठाकुर बाग स्थित एक फ्लैट में युवक निखिलेष को पंखे से फंदा लगाए मृत अवस्था में पाया गया।

रिजल्ट से परेशान था निखिलेष

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि निखिलेष हाल ही में घोषित 10+2 के परीक्षा परिणाम के बाद मानसिक तनाव में था। उसके पिता प्रेमलाल शर्मा ने पुलिस को बताया कि परीक्षा में असफल रहने के कारण वह काफी परेशान चल रहा था। आशंका जताई जा रही है कि इसी मानसिक दबाव के चलते उसने यह कठोर कदम उठाया।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : सड़क पर खड़ी मशीन से टकराई तेज रफ्तार कार, उड़े परखच्चे- 3 युवकों की मौ*त

शरीर पर नहीं कोई चोट के निशान

पुलिस द्वारा मौके पर की गई जांच में युवक के शरीर पर किसी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए हैं, जिससे शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का ही प्रतीत हो रहा है। घटना की गंभीरता को देखते हुए उप पुलिस अधीक्षक भी मौके पर पहुंचे और जांच को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

पुलिस ने दर्ज किए बयान

पुलिस टीम ने मौके पर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के जरिए साक्ष्य एकत्र किए हैं और आसपास के लोगों व गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए IGMC शिमला के शवगृह में रखा गया है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल में फौजी की बेटी ने किया टॉप, मां के छलके आंसू- 500 में 488 अंक लेकर पाया 9वां स्थान

माता-पिता नहीं जताया शक

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मृतक के माता-पिता ने किसी प्रकार का संदेह व्यक्त नहीं किया है। मामले में आगे की कार्रवाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी, जिससे मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सके।

बढ़ रहा मानसिक दबाव

लोगों का कहना है कि घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि परीक्षा परिणाम जैसे संवेदनशील समय में युवाओं पर मानसिक दबाव कितना गहरा असर डाल सकता है। ऐसे में परिवार और समाज की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे बच्चों को हर परिस्थिति में सहारा दें और उन्हें यह एहसास दिलाएं कि असफलता जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नया अवसर हो सकता है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें