शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देने के सरकारी दावों के बीच शिक्षकों की कमी का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। प्रदेश के स्कूलों में अलग-अलग श्रेणियों के हजारों पद रिक्त हैं। खास तौर पर टीजीटी, प्रवक्ता और प्रधानाचार्य कैडर में कुल 4,956 पद खाली बताए गए हैं।

सबसे ज्यादा संकट प्रवक्ता कैडर में

एक ओर सरकार सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने, मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूल शुरू करने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने की दिशा में कदम उठा रही है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में स्वीकृत शिक्षक पद खाली रहने से इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार शिक्षा विभाग में प्रवक्ता यानी पीजीटी के 3,378 पद रिक्त हैं। अलग-अलग विषयों में शिक्षकों की कमी का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।

पीजीटी में खाली पदों की स्थिति

  • सूचना विज्ञान प्रथाएं (आईपी): 984 पद
  • वाणिज्य: 330 पद
  • राजनीति शास्त्र: 321 पद
  • हिंदी: 285 पद
  • अंग्रेजी: 271 पद
  • इतिहास: 245 पद
  • अर्थशास्त्र: 211 पद
  • गणित: 142 पद
  • जीव विज्ञान: 135 पद

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  • रसायन विज्ञान: 132 पद
  • भौतिक विज्ञान: 100 पद
  • संस्कृत: 84 पद
  • भूगोल: 52 पद
  • समाजशास्त्र: 33 पद
  • संगीत: 31 पद
  • गृह विज्ञान: 10 पद
  • लोक प्रशासन: 9 पद
  • मनोविज्ञान: 3 पद

टीजीटी के भी 1,185 पद खाली

प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक यानी टीजीटी कैडर में कुल 16,730 स्वीकृत पद हैं। इनमें से 15,078 पद भरे हुए हैं, जबकि 1,185 पद रिक्त बताए गए हैं।

टीजीटी में स्ट्रीमवार खाली पद

  • TGT Arts: 653 पद
  • TGT Non-Medical: 298 पद
  • TGT Medical: 234 पद

टीजीटी में सबसे ज्यादा रिक्तियां आर्ट्स स्ट्रीम में हैं। कुल 8,493 स्वीकृत पदों में 653 पद खाली हैं। वहीं नॉन-मेडिकल में 5,170 स्वीकृत पदों में 298 और मेडिकल में 3,067 स्वीकृत पदों में 234 पद रिक्त हैं।

प्रधानाचार्यों के 393 पद खाली

स्कूलों में नेतृत्व स्तर पर भी रिक्तियों की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। प्रदेश में स्कूल प्रधानाचार्य के 393 पद खाली बताए गए हैं।

जिलावार प्रधानाचार्य पदों की स्थिति

  • शिमला: 91 पद
  • सिरमौर: 54 पद
  • चंबा: 46 पद
  • मंडी: 28 पद
  • कांगड़ा: 19 पद
  • कुल्लू: 17 पद

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  • लाहौल-स्पीति: 16 पद
  • किन्नौर: 12 पद
  • सोलन: 2 पद
  • बिलासपुर: 2 पद
  • हमीरपुर: 2 पद
  • ऊना: 1 पद

इनमें शिमला जिला सबसे आगे है, जहां प्रधानाचार्य के 91 पद रिक्त बताए गए हैं। इसके बाद सिरमौर और चंबा में बड़ी संख्या में पद खाली हैं।

जेबीटी की कमी दूर करने के लिए युक्तिकरण

शिक्षा विभाग में केवल टीजीटी, पीजीटी और प्रधानाचार्य ही नहीं, बल्कि जेबीटी शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी सामने आता रहा है। जेबीटी की उपलब्धता और स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के बीच संतुलन बनाने के लिए सरकार ने युक्तिकरण की प्रक्रिया अपनाई है। इसका उद्देश्य उन स्कूलों से शिक्षकों को जरूरत वाले स्कूलों में भेजना है, जहां विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले शिक्षक अधिक हैं।

PTR में हिमाचल की स्थिति बेहतर

शिक्षकों की हजारों रिक्तियों के बीच एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि Pupil Teacher Ratio (PTR) के मामले में हिमाचल प्रदेश की स्थिति राष्ट्रीय औसत से बेहतर बताई गई है। हिमाचल का छात्र-शिक्षक अनुपात: 14 है जबकि राष्ट्रीय औसत: 24 है। यानी उपलब्ध शिक्षकों और विद्यार्थियों के अनुपात के लिहाज से हिमाचल की स्थिति कई राज्यों की तुलना में बेहतर है।

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हालांकि, विषयवार और कैडरवार रिक्तियों के कारण अलग-अलग स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता समान नहीं है। टीजीटी कला संघ के महासचिव विजय हीर ने सरकार से पदोन्नति प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की है। उनका कहना है कि पदोन्नति के माध्यम से बड़ी संख्या में रिक्त पद भरे जा सकते हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि शिक्षकों को लंबे समय तक पूल में रखने के बजाय जरूरत के अनुसार स्कूलों में तैनात किया जाए।

सरकार का क्या कहना है?

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के अनुसार शिक्षकों के रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरने की प्रक्रिया चल रही है। प्रधानाचार्यों के पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने हैं और इसकी प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। वहीं टीजीटी और प्रवक्ताओं के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया भी जारी होने की बात सरकार की ओर से कही गई है। हिमाचल में एक तरफ सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर आधुनिक सुविधाएं देने की योजनाएं आगे बढ़ रही हैं, तो दूसरी तरफ विषय विशेषज्ञों और स्कूल प्रमुखों के हजारों पद खाली हैं।

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ऐसे में असली चुनौती केवल स्कूलों की इमारत, स्मार्ट क्लास या आधुनिक सुविधाएं तैयार करना नहीं, बल्कि हर स्कूल में पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षक उपलब्ध कराना भी है। सरकार की ओर से भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई है। अब देखना होगा कि इन रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है और इसका सीधा लाभ प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को कब तक मिलता है।

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