शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में 45 दिन की एक मासूम बच्ची की अचानक मौत हो गई है। इस घटना ने परिवार के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग को भी चिंता में डाल दिया है।
45 दिन की बच्ची की मौत
बच्ची को नियमित टीकाकरण के लिए अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन कुछ घंटों बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में उसे मृत घोषित कर दिया गया। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि परिजनों ने मौत को लेकर सवाल उठाए हैं।
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टीकाकरण के बाद बिगड़ी हालत
परिजनों के अनुसार बच्ची कियांशी को बुधवार सुबह निर्धारित टीकाकरण के लिए DDU जोनल अस्पताल लाया गया था। छह सप्ताह पूरे होने पर बच्चों को लगाए जाने वाले नियमित टीके उसे दिए गए।
कुछ ही घंटों में बच्ची....
टीकाकरण के बाद चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत कुछ समय तक बच्ची को निगरानी में रखा गया और सब कुछ सामान्य मिलने पर परिवार उसे घर ले गया। परिवार का कहना है कि घर पहुंचने के कुछ घंटे बाद बच्ची ने प्रतिक्रिया देना कम कर दिया।
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हालत देख घबराए परिजन
धीरे-धीरे उसकी हालत और बिगड़ती चली गई। स्थिति गंभीर लगने पर घबराए परिजन उसे तुरंत IGMC लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
नहीं बच सकी बच्ची की जान
चिकित्सकों ने बच्ची की जांच के बाद उसे बचाने के लिए आवश्यक आपातकालीन प्रयास किए। काफी देर तक मेडिकल टीम ने उसे पुनर्जीवित करने की कोशिश की, लेकिन अंततः बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया। इस खबर के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
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कैसे हुई बच्ची की मौत?
परिजनों का कहना है कि टीकाकरण से पहले बच्ची पूरी तरह स्वस्थ थी और सामान्य रूप से व्यवहार कर रही थी। इसी कारण वे मौत के कारणों को लेकर स्पष्ट जवाब चाहते हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
घटना के बाद बच्ची के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। प्रारंभिक चिकित्सकीय जांच में ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है जिससे यह कहा जा सके कि मौत सीधे तौर पर टीके के प्रभाव से हुई। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और वैज्ञानिक रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
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पोस्टमार्टम के दौरान आवश्यक नमूने भी सुरक्षित किए गए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों पर स्पष्टता आ पाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं। विभाग यह पता लगाने का प्रयास करेगा कि टीकाकरण प्रक्रिया, निगरानी व्यवस्था और बाद की परिस्थितियों में कहीं कोई असामान्यता तो नहीं रही।
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24 बच्चों को लगा टीका
जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने उसी दिन टीकाकरण कराने वाले अन्य बच्चों की भी जानकारी जुटाई। बताया जा रहा है कि उसी सत्र में टीका लगवाने वाले बाकी सभी 24 अन्य बच्चे स्वस्थ हैं। इसके बावजूद विभाग ने एहतियात के तौर पर उनके स्वास्थ्य की निगरानी जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
आशा कार्यकर्ताओं को दिए गए निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित क्षेत्रों की आशा कार्यकर्ताओं को टीकाकरण कराने वाले बच्चों के घरों तक पहुंचकर उनकी स्थिति की जानकारी लेने के निर्देश दिए हैं। विभाग चाहता है कि किसी भी बच्चे में असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
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परिवार में पसरा मातम
करीब डेढ़ महीने पहले घर में जन्मी कियांशी परिवार के लिए खुशियों का बड़ा कारण बनी थी। उसकी किलकारियों से घर का माहौल बदल गया था। परिवार को उम्मीद नहीं थी कि नियमित टीकाकरण के लिए अस्पताल ले जाने के कुछ घंटों बाद ही उन्हें इतना बड़ा सदमा झेलना पड़ेगा।
पुलिस भी कर रही पड़ताल
परिजनों द्वारा शिकायत दिए जाने के बाद पुलिस ने भी मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट और चिकित्सकीय तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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मामले की गहनता से हो रही जांच
फिलहाल इस पूरे मामले में मौत के कारणों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग, फॉरेंसिक विशेषज्ञ और पुलिस अपनी-अपनी जांच कर रहे हैं। सभी की नजर अब विस्तृत पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जो इस दुखद घटना की असली वजह सामने ला सकती है।
